
नई दिल्ली। बढ़ते दुरुपयोग के मद्देनजर सरकार ने शुक्रवार को 25 कैप्टिव पावर प्लांटों [सीपीपी] के कोयला अनुबंध रद्द कर दिए हैं। इसके साथ ही उसने करीब 1300 मेगावाट बिजली उत्पादन क्षमता वाले इन प्लांटों को कोयले की आपूर्ति ठप कर दी है। ऐसे कैप्टिव पावर प्लांटों को कोयला आपूर्ति के लिए विशेष खदान आवंटित कर दी जाती है।
कोयला मंत्रालय ने ईधन अनुबंधों के दुरुयोग के खिलाफ अन्य 15 उद्योगों को भी चेतावनी दी है। इनसे कहा गया है कि उन्होंने अगर 15 दिनों के भीतर अपनी परियोजनाओं का विस्तृत ब्यौरा मुहैया नहीं कराया तो उनके अनुबंध भी रद्द कर दिए जाएंगे।
कोयला मंत्री श्री प्रकाश जायसवाल ने बताया कि जिन सीपीपी के अनुबंध निरस्त करने की मंजूरी दी गई है, उनमें 58 लाख 44 हजार टन कोयले की प्रतिवर्ष जरूरत पड़ेगी। इन पावर प्लांटों को कोयला खदानों से लिंकेज की सुविधा अनुबंधों के तहत वर्ष 1996-2006 के बीच दी गई थी। काफी लंबी अवधि गुजर जाने के बाद भी इन उद्योगों में से कई ने अपने पावर प्लांट ही स्थापित ही नहीं किए।