नई दिल्ली, जागरण ब्यूरो। माल ढुलाई के लिए वैगनों की कमी से जूझ रहे उद्योग को कुछ राहत मिल सकती है। रेलवे की इस बार माल डिब्बों की बड़े पैमाने पर खरीद की योजना है। यात्री गाड़ियों में सवारी डिब्बों और रेल इंजनों की कमी को पूरा करने के लिए भी लगता है रेलवे ने कमर कस ली है। वर्ष 2009-10 के रेल बजट में इन सब पर 12393 करोड़ रुपये खर्च करने का प्रावधान है।
रेल मंत्री ममता बनर्जी ने शुक्रवार को रेल बजट पेश करते हुए कहा कि मालगाड़ी के डिब्बों की मांग लगातार बढ़ रही है। चूंकि रेलवे की मौजूदा इकाइयां इस मांग को पूरा नहीं कर पा रही हैं, इसलिए रेलवे ने सार्वजनिक क्षेत्र की बर्न स्टैंडर्ड और ब्रेथवेट की माल डिब्बा इकाइयों के अधिग्रहण की योजना भी बनाई है। इसके लिए रेलवे ने बातचीत भी शुरू कर दी है।
रेल बजट के मुताबिक वर्ष 2009-10 में रेलवे 18000 माल डिब्बे खरीदेगी। इन पर 3616.61 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। माल डिब्बों की कमी की वजह से उद्योग लगातार माल ढुलाई के लिए वैगन की कमी की शिकायत करते रहे हैं।
रेलवे ने इस बार भी कई नई रेलगाड़ियां चलाने का फैसला किया है। लिहाजा उनके लिए सवारी डिब्बों की भी जरूरत होगी। इसलिए रेलवे ने इस साल करीब तीन हजार सवारी डिब्बे खरीदने का फैसला किया है। ये सवारी डिब्बे रेल कोच फैक्ट्री कपूरथला और चेन्नई के सवारी डिब्बा कारखाने में बनाए जाएंगे। नए सवारी डिब्बों की खरीद पर 4247.06 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।
यात्रियों की सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए रेलवे की अपने बेड़े में दो मंजिला वातानुकूलित सवारी डिब्बे भी शामिल करने की योजना है। इन उच्च क्षमता वाले सवारी डिब्बों का इस्तेमाल इंटरसिटी यात्रा के लिए किया जा सकेगा। रेल मंत्री ने इसकी घोषणा करते हुए कहा कि ये बहुत सुविधाजनक और आरामदायक होंगे।
नई रेलगाड़ियां चलेंगी तो नए रेल इंजनों की भी जरूरत होगी। इसलिए रेलवे ने इस साल 500 नए इंजन बनाने का लक्ष्य रखा है। इनमें 150 रेल इंजन च्च्च क्षमता वाले होंगे। इसके अलावा डीजल इंजनों के मौजूदा बेड़े को भी अपग्रेड किया जाएगा। इन सभी मदों पर 4274.28 करोड़ रुपये खर्च करने की योजना है।
रेलवे ने बेंगलूर के रेल पहिया कारखाने में इस साल उत्पादन बढ़ाने का लक्ष्य रखा है। इस साल इस कारखाने में दो लाख पहियों का निर्माण किया जाएगा। इसके अलावा रेलवे अपने कारखानों की संपूर्ण दक्षता में सुधार करने और लागत में कमी लाने के लिए भी एक व्यावसायिक योजना बनाएगी। इस योजना को गोल्डन राक, परेल, अजमेर और खड़गपुर कारखानों में लागू किया जाएगा।