
नई दिल्ली, जागरण ब्यूरो। देश में तेजी से फल-फूल रहे खाद्य प्रसंस्करण उद्योग को बढ़ावा देने के लिए रेलवे ने भी पहल की है। रेल मंत्रालय फलों, सब्जियों व मछलियों जैसे नष्ट हो जाने वाले खाद्य उत्पादों को शीघ्रता से एक स्थान से दूसरे स्थान पर पहुंचाने के लिए विशेष रेल गाडि़यां चलाने की संभावना पर विचार हो रहा है। इसके साथ ही रेलवे शीघ्र ही देश भर में निजी माल टर्मिनलों व मल्टी-माडल लाजिस्टिक पार्को के निर्माण के लिए एक नई नीति की घोषणा भी की जाएगी। रेल बजट 2009-10 पेश करते हुए रेल मंत्री ममता बनर्जी ने निजी क्षेत्र को लुभाने में कोई कसर नहीं छोड़ी है।
ममता ने भी साफ कर दिया है कि माल ढुलाई रेलवे के लिए सबसे महत्वपूर्ण क्षेत्र है। यही कारण है कि उन्होंने इसके लिए अब उद्योगों पर भी दाने डालने शुरू कर दिए हैं, जिनका रेलवे के साथ अभी तक छत्तीस का आंकड़ा है। ममता के मुताबिक कोयले, आयरन ओर, सीमेंट, उर्वरक व खाद्यान्न के लदान में बेहतरी लाने के अलावा रेलवे आटोमोबाइल, फ्लाई ऐश जैसे नए यातायात क्षेत्रों में भी भागीदारी बढ़ाएगा। कंटेनरों को निजी साइडिंगों तक जाने की अनुमति देने की घोषणा भी ममता ने की है। साथ ही तीन मार्गो के बीच 'तीव्रतर पार्सल सेवा' के रूप में प्रीमियम पार्सल सेवा शुरू करने की घोषणा की है। ये तीनों सेवाएं तुगलकाबाद [दिल्ली] से रोयापुरम [चेन्नई], वापी [मुंबई] और हावड़ा के लिए शुरू की जाएंगी।
इसके अलावा भी रेल मंत्री ने प्रीमियम कंटेनर सेवा चलाने का भी ऐलान किया है। इस सेवा के तहत पूर्व निर्धारित समय पर कंटेनर को गंतव्य स्थान पर पहुंचाया जाएगा। इन सेवाओं के लिए शुल्क निर्धारण की नीति क्या होगी, इस बारे में उन्होंने कुछ नहीं कहा है। लेकिन हो सकता है कि प्रीमियम सेवा के लिए कुछ ज्यादा माल भाड़ा वसूला जाए। उन्होंने माल टर्मिनलों को पूरी तरह से निजी स्वामित्व में सौंपने के भी संकेत दिए हैं। इसी तरह से विशेष जिंसों के लिए रोलिंग स्टाक के निजी स्वामित्व की अनुमति भी दी जाएगी। उन्होंने पूर्वी व पश्चिमी डेडीकेटेड माल गलियारों के साथ मेगा लाजिस्टिक हब स्थापित करने का भी ऐलान किया है। इसके लिए राज्य सरकारों को भी हिस्सेदार बनाया जा सकता है। अलग-अलग उद्योगों के लिए अलग-अलग लाजिस्टिक केंद्र बनाए जा सकते हैं।
ममता ने बताया कि देश में सालाना 40 हजार करोड़ रुपये के फल व सब्जियां बेकार हो जाते हैं। रेलवे का फलों व सब्जियों, मछलियों सहित अन्य नाशवान उत्पादों को उनके उत्पादन स्थल से चिन्हित बाजार में पहुंचाने के लिए विशेष गाडि़यां चलाई जाएंगी। इस तरह से रेलवे ने दूसरी हरित क्रांति में अपना योगदान देने की पेशकश की है। साथ ही सरकारी व निजी क्षेत्र के सहयोग से कोल्ड स्टोरेज व इन सुविधाओं वाले कार्गो केंद्र स्थापित करने का भी प्रस्ताव किया गया है। इस तरह के रेलवे स्थलों का पता लगाने व पूरी योजना बनाने के लिए व्यावसायिक एजेंसियों की मदद ली जाएगी। इसी तरह की योजना रेलवे ग्रामीण हस्तशिल्प, कुटीर उद्योग या वस्त्र उद्योग के लिए भी शुरू कर सकता है।