
नई दिल्ली। वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी संप्रग सरकार में अपना दूसरा बजट पेश करने दो रूमाल लेकर आए दो बार उन्हें टोका गया दो-दो बार उनके पास पर्ची आई और उन्होंने दो बार कौटिल्य का हवाला दिया।
है न दो का अजीब संयोग। झक सफेद पैंट और बंद गले का कोट पहन कर संप्रग सरकार के दूसरे कार्यकाल का पहला नियमित आम बजट पेश करने आए मुखर्जी के कोट में दो जेब नीचे की तरफ बनी थी।
मुखर्जी ने इससे पहले पिछली सरकार के कार्यकाल के आखिरी वक्त में अंतरिम बजट पेश किया था। बजट पेश करने के लिए वह लोकसभा की कार्यवाही शुरू होने से कुछ क्षण पहले हाथ में कत्थई लेदर ब्रीफकेस लेकर पहुंचे और सदस्यों ने मेजें थपथपाकर उनका स्वागत किया।
वित्त मंत्री का बजट भाषण सुनने के लिए राज्यसभा की गैलरी खचाखच भरी थी जिनमें राहुल बजाज, राजकुमार धूत, मनोहर जोशी, शोभना भरतिया, महेन्द्र मोहन, एमएस स्वामीनाथन, अश्वनी कुमार और राजनीति प्रसाद आदि शामिल थे। कुछ पूर्व लोकसभा सदस्य भी विशिष्ट दीर्घा में मौजूद थे। मुखर्जी ने जब एफबीटी हटाने की घोषणा की तो बजाज ने अपने दोनों हाथों से थम्सअर्प बनाकर उसका स्वागत किया।
सदन में उस समय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी विपक्ष के नेता लालकृष्ण आडवाणी आदि मौजूद थे। कांग्रेस के युवा नेता राहुल गांधी वित्त मंत्री का बजट भाषण शुरू होने के कुछ देर बाद सदन में आए और पीछे की पंक्ति में बैठ गए। उसी पंक्ति में एक छोर में रेल मंत्री ममता बनर्जी भी बैठी थीं। राहुल हालांकि विदेश मंत्री एसएम कृष्णा के पास बैठे थे।
इससे पहले पी चिदंबरम के वित्त मंत्री रहने के दौरान जब वह बजट पेश करने आते थे तो उनके परिवार के सदस्य उनका भाषण सुनने के लिए आते थे लेकिन मुखर्जी का परिवार विशिष्ट दीर्घा में नहीं दिखा।
वित्त मंत्री ने जब ठीक 11 बजे अपना बजट भाषण पढ़ना शुरू किया उस समय सदन में काफी सीटें खाली थीं लेकिन समय के साथ सदस्य आते रहे। लेकिन आखिर तक स्थिति यह हुई कि करीब डेढ़ दर्जन सीटें ही खाली बचीं रहीं।
पूरे बजट भाषण के दौरान मुखर्जी ने कम से कम चार बार पानी से गला तर किया और कर प्रस्तावों पर आने के वक्त तो उन्होंने कहा भी अब मैं कर प्रस्तावों पर आता हूं लेकिन उससे पहले एक घूंट पानी पी लूं।
मुखर्जी अपनी जेब में रखे दो सफेद रूमालों का भी लगातार उपयोग करते रहे। उनसे वे बीच बीच में अपना मुंह पोंछ रहे थे और कई बार यह स्थिति हो रही थी कि दोनों रूमालें एक जेब में रहतीं तो कभी दोनों अलग अलग जेबों में। बीच बीच में वे रूमाल को निकालते और फिर कोट के निचले हिस्से में बनी जेब में रख लेते।
उनके बजट भाषण के दौरान अधिकारियों की तरफ से उनके पास दो पर्चियां आई। पहली पीली पर्ची ने उन्हें गलती का एहसास कराया। करीब 11. 52 बजे आई पहली पर्ची पढ़ने के बाद मुखर्जी ने लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार की ओर मुखातिब होते हुए कहा कि बजट पढ़ने के क्रम में उनसे दो पैरा छूट गए हैं। इसके बाद उन्होंने पैरा संख्या 53 और 54 पढ़ा और कहा मैडम स्पीकर इस भूल के लिए मुझे क्षमा करें। दूसरी सफेद पर्ची उनके पास 12.05 पर आई लेकिन उसे देखकर वित्त मंत्री ने रख दिया।
मुखर्जी जब अपना बजट भाषण पढ़ रहे थे तो करीब सवा 12 बजे सपा नेता मुलायम सिंह यादव अपने स्थान पर खड़े हो गए और उन्होंने कुछ कहने का प्रयास किया। इस पर मुखर्जी ने हिन्दी में कहा कि आप मेहरबानी करके बैठिए। बाद में पूछिए। इसके बाद अंग्रेजी भाषा में उन्होंने कहा कि यह महत्वपूर्ण है मुलायम सिंह जी जो लोग सुन रहे हें वे इन प्रस्तावों का इंतजार कर रहे हैं।
इसके करीब दस मिनट बाद राजद नेता लालू प्रसाद ने बिहार को विशेष पैकेज दिए जाने की ओर वित्त मंत्री का ध्यान खींचने का प्रयास किया। लालू के कदम से भी मुखर्जी के भाषण में व्यवधान पड़ा। उस समय वह जिस पैराग्राफ को पढ़ रहे थे उसे उन्हें दोबार पढ़ना पड़ा। वित्त मंत्री ने कहा मैं फिर से पढ़ रहा हूं मैडम।
इससे पहले मुखर्जी ने अपने बजट भाषण के दौरान प्राचीन भारत के प्रख्यात राजनीतिज्ञ और अर्थशास्त्री कौटिल्य का दो बार हवाला दिया। पहली बार तब जब वह एफआरबीएम लक्ष्य की बात कर रहे थे और दूसरी दफा तब जब राजस्व वसूली पर राय रख रहे थे।
मुखर्जी का भाषण करीब एक घंटा चालीस मिनट चला। उनके भाषण खत्म करते ही भाजपा सदस्य अपने स्थानों पर खड़े हो गए और कहने लगे कि बजट में महंगाई नियंत्रित करने के बारे में कुछ नहीं है।