रक्षा खरीद पर होगी सरकार की नजर

 
Jul 06, 09:33 pm

नई दिल्ली [जागरण ब्यूरो]। रक्षा खरीद की प्राथमिकताएं सरकार के बजट में स्पष्ट है। इस साल रक्षा बजट में 34 फीसदी बढ़ोतरी के साथ इस मद में 1,41,703 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। जाहिर है कि मुंबई घटना में नजर आई सुरक्षा चूक के मद्देनजर रक्षा खरीद सरकार की प्राथमिकता में है।

पिछले साल के मुकाबले रक्षा बजट में लगभग 36 हजार करोड़ रुपये की बढ़ोतरी की गई है। वर्ष 2007-08 में रक्षा बजट 96 हजार करोड़ रुपये था। पिछले साल इसमें 10 फीसदी की बढ़ोतरी की गई थी, जबकि इस बार यह आंकड़ा 34 फीसदी है।

दरअसल, सरकार कुछ रक्षा सामग्री की खरीद करने में जुटी है। गौरतलब है कि पिछले साल सरकार का लाइट यूटिलिटी हेलीकाप्टर व 155 एमएम आर्टिलरी गन खरीद का मामला अटक गया था। नतीजतन मंत्रालय ने लगभग 7000 करोड़ रुपये वापस किए थे।

बीते नवंबर में मुंबई में हुए आतंकी हमले के बाद सरकार के पास रक्षा सामग्री खरीद की लंबी सूची है। रक्षाकर्मिर्यो ने भी लंबी सूची दी है। दूसरी तरफ, सरकार ने सुरक्षा ढांचे के पुनर्गठन की भी तैयारी की है। इसके तहत कोस्टल कमांड के गठन के अलावा समुद्री सुरक्षा का पूरा उत्तरदायित्व नौसेना को दिया जाना शामिल है।

इधर, भूतपूर्व सैनिकों के लिए एक रैंक, एक पेंशन की मांग भी पूरी की जाएगी। सोमवार को लोकसभा में बजट पेश करते हुए वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने कहा कि एक जनवरी 2006 से पूर्व के पेंशन में सुधार किया जाएगा तथा 10 अक्टूबर 1997 के पहले और बाद के पेंशनभोगियों को समकक्ष लाया जाएगा।

जनवरी 2006 में अवकाश प्राप्त करने वाले जवानों को छठे वेतन आयोग का लाभ भी नहीं मिल पाया था।

क्या होगा असर

करीब 12 लाख से अधिक जवानों और जेसीओ की पेंशन राशि बढ़ जाएगी।




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