
नई दिल्ली। ऊर्जा क्षेत्र में ईरान की बदलती वरीयता और परिदृश्य के बीच भारत उसके साथ अपने ऊर्जा सहयोग की समीक्षा करेगा। पेट्रोलियम मंत्री मुरली देवड़ा अगले सप्ताह पेइचिंग में ईरान के नेताओं से मिल रहे हैं।
ईरान ने हाल ही में कई ऐसे फैसले किए हैं जिससे भारत को यह पहल करनी पड़ रही है। ईरान ने अपने विशालकाय दक्षिण अजादेगा तेल क्षेत्र को चीन को आवंटित किया है। इसमें ओएनजीसी-हिंदुजा ग्रुप के संयुक्त उद्यम की दावेदारी धरी रह गई। इसी तरह पारस की खाड़ी में साऊथ पार्स गैस क्षेत्र के 12वें चरण में इसी ओएनजीसी और हिंदुजा समूह के उपक्रम को प्रस्तावित 60 प्रतिशत हिस्सेदारी दिए जाने की बात थी, पर इसका 20 प्रतिशत हिस्सा अंगोला की कंपनी को देने का निर्णय कर लिया गया है।
देवड़ा शांगहाए कारपोरेनशन आर्गेनाइजेश [एससीओ] की बैठक में भाग लेने के लिए 13 अक्टूबर को पेइचिंग जा रहे हैं। उनकी वहां ईरान के प्रथम उपराष्ट्रपति मोहम्मद रेजा राहिमी से मुलाकात की संभावना है। उन्होंने इस बारे में कहा कि कोई एजेंडा नहीं है, लेकिन बैठक में, मैं सभी लंबित मुद्दों पर विचार करूंगा। ईरान ने पिछले साल साउथ अजादेगा तेल क्षेत्र और साउथ पारस चरण-12 [एसपी-12] गैस क्षेत्र की पहचान भारत की ओएनजीसी और हिंदुजा ग्रुप के संयुक्त उद्यम के लिए की थी। बहरहाल, 21 महीने बाद भी इस दिशा में कोई प्रगति नहीं हुई और ईरान ने इसकी जिम्मेदारी भारत पर डाली है।
ईरान का मानना है कि अमेरिकी दबाव के कारण भारत, ऊर्जा समझौतों को लेकर टालमटोल कर सकता है। हालांकि देवड़ा ने कहा है कि भारत, ईरान के साथ अपने संबंधों को काफी अहमियत देता है और वहां से जुड़ी ऊर्जा परियोजनाओं को आगे बढ़ाता रहेगा।
पिछले सप्ताह ईरान ने 2,60,000 बैरल प्रतिदिन क्षमता वाले साऊथ अजादेगा तेल क्षेत्र को चीन की सीएनपीसी को देने के संबंध में समझौते पर हस्ताक्षर किए। और अब ईरान ने 7.5 अरब डालर के एसपी-12 में भारत को दी जाने वाली 60 फीसदी भागीदारी में से एक तिहाई हिस्सा अंगोला की सरकारी कंपनी सोनानगोल को दे दिया है।
देवड़ा ने कहा कि ईरान के साथ हमारे गहरे संबंध हैं, वह चाहे पाइपलाइन से गैस मंगवाना हो या ओएनजीसी के लिए तेल एवं गैस क्षेत्र। हम अपनी परियोजनाओं को आगे बढ़ाते रहेंगे और तेल-गैस क्षेत्र हासिल करने के हमारे सार्वजनिक कंपनियों के प्रयासों का समर्थन करेंगे।
उन्होंने उम्मीद जताई कि ईरान ओएनजीसी को कम से कम एक बड़ा तेल व गैस क्षेत्र देने पर विचार करेगा। उनकी ईरान के नए तेल मंत्री मसूद मिरकाजेमी से मिलने की भी मंशा है।