
नई दिल्ली। खाद्य पदार्थो और औद्योगिक वस्तुओं की बढ़ती कीमतों से अगले छह महीने में मुद्रास्फीति आठ फीसदी के आंकड़ों को छू सकती है। वैश्विक वित्तीय सेवा प्रदाता कंपनी नोमुरा का यह अनुमान भारतीय रिजर्व बैंक के महंगाई दर के पांच फीसदी रहने के अनुमान से कहीं अधिक है।
नोमुरा ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि हमने वर्ष 2009-10 में वर्ष दर वर्ष आधार पर थोक मूल्य आधारित औसत मुद्रास्फीति के अनुमान को दो फीसदी से बढ़ाकर तीन फीसदी और 2010-11 के लिए 5.7 फीसदी से बढ़ाकर 6.8 फीसदी कर दिया है। मार्च 2010 तक मुद्रास्फीति रिजर्व बैंक के पांच फीसदी के अनुमान के विपरीत आठ फीसदी रहने की संभावना है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि मुद्रास्फीति आरबीआई के अनुमान के स्तर से पहले ही ऊपर है, लेकिन केंद्रीय बैंक इस बात की पुष्टि की इंतजार कर रहा है कि मौजूदा पुनरूत्थान टिकाऊ है या नहीं।
रिपोर्ट के अनुसार, हम 2010 के अंत तक नकद आरक्षी अनुपात [सीआरआर] में 1.25 फीसदी की बढ़ोतरी की उम्मीद कर रहे हैं। इसमें पहली बढ़ोतरी साल के अंत से पहले हो सकती है।
नोमुरा के अनुसार थोक मूल्य सूचकांक के आधार पर साधनों की कीमत, उत्पादन के मूल्य के मुकाबले ज्यादा तेजी से बढ़ने का अनुमान है।