नई दिल्ली, [सुरेंद्र प्रसाद सिंह]। राज्य सरकारों के नकारापन और केंद्र की उपेक्षा से उत्तर भारत के राज्यों में खाद का भारी संकट पैदा हो गया है। राज्यों के गलत आकलन और लचर वितरण व्यवस्था के चलते पहले ही हालत गंभीर है। अब केंद्र सरकार ने भी खाद वितरण को राज्य सरकारों का दायित्व बताकर अपना पल्ला झाड़ लिया है। राज्यों और केंद्र की इस धींगामुश्ती में उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और हरियाणा के किसान बुवाई मेंकाम आने वाली डीएपी और एनपीके की जबर्दस्त कमी से जूझ रहे हैं। इससे रबी की बुवाई पिछड़ने की आशंका बढ़ गई है।
केंद्र सरकार भी मान रही है कि अगर हालात न सुधरे तो रबी सीजन में गेहूं समेत प्रमुख दलहन फसलों की बुवाई पिछड़ सकती है। इस आशंका से कृषि मंत्रालय के होश उड़े हुए हैं, लेकिन राज्यों की ओर से हुई गलती को सुधारने के लिए वह अपनी तरफ से कुछ करने को तैयार भी नहीं। 15 नवंबर से गेहूं की बुवाई पूरे जोरों पर होगी, लेकिन किसानों के सामने खाद की किल्लत मुंह बाये खड़ी है। बुवाई के लिए आधार खाद के रूप में डाई अमोनियम फास्फेट व नाइट्रोजन कैल्सियम और पोटाश [एनपीके] जैसी मिश्रित खादों की सख्त जरूरत होती है।
पिछले दिनों रबी सम्मेलन के दौरान उत्तर प्रदेश ने केंद्र से आगामी रबी फसलों के लिए कुल 48 लाख टन खाद की मांग की थी, जबकि पिछले साल यह मात्रा 45 लाख टन थी। इसमें 30 लाख टन यूरिया, 12 लाख टन डीएपी और 4.50 लाख टन एनपीके शामिल थी। सम्मेलन में राज्य के प्रतिनिधि ने रबी फसलों की बुवाई के दौरान डीएपी व एनपीके की उपलब्धता के बारे में आशंका भी जताई थी। राज्य की ओर से खादों की समय से आपूर्ति के लिए आग्रह किया गया था। सूखे के चलते इस रबी में 3.66 लाख हेक्टेयर दलहन की अतिरिक्त बुवाई की संभावना है। इसके लिए 50 हजार टन डीएपी की अतिरिक्त मांग भी की गई थी। केंद्र का कहना है कि राज्य की मांग के अनुरूप खाद की आपूर्ति कर दी गई है। वितरण में गड़बड़ी की वजह से खाद का संकट पैदा हुआ है।
खाद की किल्लत झेलने वालों में बिहार के किसान भी हैं, जिसके लिए राज्य सरकार की विफलता प्रमुख रूप से जिम्मेदार है। राज्य में खाद वितरण की कोई सरकारी एजेंसी ही नहीं है, जिसका खुलासा राज्य सरकार ने रबी सम्मेलन के दौरान किया है। बिहार सरकार ने खाद के आयातकों व खाद उत्पादक कंपनियों से आग्रह किया है कि वे समय पर खाद की आपूर्ति कर उसका सहयोग करें। हैरानी की बात यह है कि बिहार ने पिछले साल के मुकाबले खाद की कम मांग की है। इसमें यूरिया 50 हजार टन, डीएपी 25 हजार टन और एनपीके 90 हजार टन कम है।
हरियाणा में खादों की आपूर्ति के लिए सरकारी एजेंसी हैफेड अहम भूमिका निभाती है। चालू सीजन के लिए तीन लाख टन का स्टाक भी कर लिया गया है। लेकिन राज्य में डीएपी की आपूर्ति में देरी की आशंका है। राज्य सरकार ने इफको और आईपीएल से आपूर्ति बढ़ाने का आग्रह किया है। कमोबेश यही हालत झारखंड और उत्तराखंड की भी है।