
नई दिल्ली। सरकार ने सूखे और बाढ़ के कारण खरीफ के उत्पादन में गिरावट के बीच खाद्य वस्तुओं की कीमतों की महंगाई को ले कर बुधवार चिंता प्रकट की और उम्मीद जाहिर की कि अगली फसल आने के बाद कीमतों का दबाव कम होगा।
आगामी रबी की फसल मुख्य रूप से मार्च अप्रैल तक बाजार में अपनी शुरू होगी। खाद्य एवं कृषि मंत्री शरद पवार ने बुधवार को यहां आर्थिक संपादकों के सम्मेलन में कहा कि खाद्य सामग्रियों में मुद्रास्फीति चिंता का विषय है तथा इन जिंसों की कीमत में तेजी को रोकने के लिए केंद्र सरकार ने कई कदम उठाए हैं।
यह पूछने पर कि क्या उन्हें अगले तीन महीनों में खाद्य पदार्थो की कीमतों के कम होने की संभावना नजर आती है, पवार ने कहा कि अभी कुछ भी कहना मुश्किल है। लेकिन रबी फसल की कटाई के बाद स्थिति में बदलाव आएगा।
सरकार के अपने आंकड़े के अनुसार 17 अक्टूबर को समाप्त सप्ताह में वर्ष दर वर्ष आधार पर खाद्य सामग्रियों की थोक कीमतें औसतन करीब 13 प्रतिशत बढ़ गईं। इस दौरान दलहनों में 23 प्रतिशत की भारी वृद्धि हुई।
सरकार ने मंगलवार को कहा था कि इस वर्ष सूखे की स्थिति और उसके बाद बाढ़ के कारण पिछली खरीफ के खाद्यान्न उत्पादन में 2.1 करोड़ टन की गिरावट हुई है। कृषि मंत्रालय का चावल उत्पादन में 1.5 करोड़ टन तथा मोटे अनाजों के उत्पादन में 55 लाख कम रहने का अनुमान व्यक्त किया गया है।
पवार ने बुधवार को कहा कि सरकार ने इस बार रबी [सर्दियों] के उत्पादन में पिछले वर्ष के मुकाबले 85 लाख टन की वृद्धि करने का लक्ष्य निर्धारित किया है ताकि सूखे और बाढ़ के बाद गर्मी में बोई जाने वाली फसलों के उत्पादन में हुई कमी की थोड़ी भरपाई की जा सके। उन्होंने कहा कि हमने खरीफ फसल में हुई कमी कीे याथ संभव भरपाई के लिए रबी फसलों का उत्पादन बढ़ाने के उपाय किए हैं देर से हुई मानसूनी बरसात के कारण जमीन में नमी के स्तर में हुए सुधार ने रबी फसल के बेहतर होने की संभावना को बढ़ा दिया है।