
नई दिल्ली। सरकार ने बृहस्पतिवार को बेबाक विनिवेश योजना का ऐलान करते हुए मुनाफा कमाने वाले सभी सार्वजनिक उपक्रमों को सूचीबद्ध करने की अनिवार्यता सुनिश्चित कर दी। इससे 100 से अधिक कंपनियों की सार्वजनिक पेशकश का रास्ता खुल गया है। इस तरह की बिक्री से एकत्र धन का इस्तेमाल सामाजिक क्षेत्र की स्कीमों के लिए किया जाएगा। पहले से सूचीबद्ध केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रमों को अपने कम से कम 10 प्रतिशत शेयरों की सार्वजनिक बिक्री करनी होगी।
गृह मंत्री पी चिदंबरम ने आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति की बैठक के बाद यहां संवाददाताओं को बताया कि तीन साल तक लगातार मुनाफा कमाने वाली गैर सूचीबद्ध कंपनियों को अपनी आरंभिक सार्वजनिक पेशकश लानी होगी।
कांग्रेस के नेतृत्व वाली संप्रग सरकार ने अपने दूसरे कार्यकाल में दो सार्वजनिक उपक्रमों एनएचपीसी और आयल इंडिया को सूचीबद्ध करने का रास्ता पहले ही तैयार कर दिया है। आज के फैसले से और अधिक सार्वजिनक उपक्रम पूंजी बाजार में प्रवेश कर सकेंगे। इस समय 40 सूचीबद्ध सरकारी कंपनियां हैं और बीएसएनएल सहित सौ से अधिक कंपनियां सूचीबद्धता की पात्रता रखती हैं।
चिदंबरम ने कहा कि केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रमों के बाजार में प्रवेश से सरकार की कुछ हिस्सेदारी का विनिवेश होगा। उन्होंने कहा कि यह काम बाजार के हालात अनुकूल होने और उचित समय आने पर किया जाएगा।
चिदंबरम ने बताया कि ऐसी सभी गैर सूचीबद्ध कंपनियों को स्टाक एक्सचेंजों में सूचीबद्ध किया जाएगा, जिनकी कोई संचई हानि नहीं है और जो लगातार तीन साल से मुनाफा कमा रही हैं।
इस सवाल पर कि अंतत: सूचीबद्ध होने वाली गैर सूचीबद्ध कंपनियों के भी दस प्रतिशत शेयरों की सार्वजनिक बिक्री की जाएगी, चिदंबरम ने कहा, 'निस्संदेह मुनाफा कमाने वाली किसी भी कंपनी में सरकार शत प्रतिशत हिस्सेदारी नहीं रख सकती।'
गृह मंत्री ने कहा कि संसद के दोनों सदनों की बैठक को राष्ट्रपति के अभिभाषण में और वित्त मंत्री के बजट भाषण में साफ कहा गया था कि सरकार विनिवेश कार्यक्रम में जनता की हिस्सेदारी को प्रोत्साहित करेगी।
उन्होंने कहा कि सरकार का मानना है कि सार्वजनिक उपक्रम राष्ट्र की संपत्ति हैं और इस संपत्ति का कुछ हिस्सा जनता के पास होना चाहिए, जबकि सरकार के पास कम से कम 51 प्रतिशत हिस्सेदारी रहेगी।
चिदंबरम ने कहा कि विनिवेश प्रक्रिया से एकत्र होने वाला धन राष्ट्रीय निवेश फंड में जमा होगा। अप्रैल 2009 से मार्च 2012 तक इस फंड में जमा होने वाले धन का इस्तेमाल सामाजिक क्षेत्र की स्कीमों के पूंजी व्यय के मद में होगा, जबकि अप्रैल 2012 के बाद राष्ट्रीय निवेश फंड की यथास्थिति बरकरार रहेगी। उन्होंने कहा कि कठिन राजकोषीय स्थिति के मद्देनजर यह फैसला किया गया है। यह वित्तपोषण का अतिरिक्त संसाधन है।