
नई दिल्ली। निजी क्षेत्र की कंपनियों के सीईओ के वेतन की सीमा निर्धारित करने को लेकर कारपोरेट मामलों के मंत्री सलमान खुर्शीद का नजरिया पूरी तरह बदल चुका है। कुछ दिन पहले तक वह निजी कंपनियों के शीर्ष अधिकारियों को दिए जा रहे बहुत ज्यादा वेतन को अनावश्यक करार दे रहे थे। लेकिन अब वह सीईओ के वेतन को लेकर निजी कंपनियों को पूरी स्वतंत्रता देने के पक्ष में आ गए हैं। इसकी व्यवस्था नए कंपनी विधेयक में की भी जा रही है। संसद के अगले सत्र में पेश होने वाले इस विधेयक में निजी कंपनियां अपने सीईओ को मनमाफिक वेतन दे सकेंगी।
मौजूदा कंपनी अधिनियम के प्रावधानों के मुताबिक कंपनियां अपने शुद्ध मुनाफे का अधिकतम 11 फीसदी तक वेतन मुख्य कार्यकारी अधिकारी को दे सकती हैं। नए कंपनी विधेयक में इस सीमा को समाप्त किया जा रहा है। इस बात की जानकारी स्वयं खुर्शीद ने भारतीय कंपनी सचिव संस्थान की सालाना बैठक को संबोधित करते हुए दी। उन्होंने यह भी बताया कि सरकार ने वेतन की सीमा बांधने संबंधी नियम को हटाने का फैसला अपने स्तर पर किया है। इसके लिए किसी कारपोरेट क्षेत्र की तरफ से कोई मांग नहीं आई थी। इस विधेयक पर फिलहाल संसदीय समिति विचार कर रही है।
पिछले महीने खुर्शीद, योजना आयोग के उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह अहलूवालिया, वाणिज्य मंत्री आनंद शर्मा ने एक साथ निजी क्षेत्र में आला अफसरों को दिए जा रहे ज्यादा वेतन को अनुचित माना था। कुछ मंत्रियों ने तो इसे शर्मनाक करार दिया था। सरकार के आला मंत्रियों की तरफ से इस तरह के बयान आने के बाद उद्योग जगत में भी काफी हलचल मची थी। बाद में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने स्वयं हस्तक्षेप कर मामले को शांत करने की कोशिश की थी।
दो वर्ष पहले प्रधानमंत्री ने स्वयं उद्योग जगत के एक सेमिनार को संबोधित करते हुए इस मुद्दे को उठाया था। बाद में उद्योग चैंबर सीआईआई ने निजी क्षेत्र में शीर्ष स्तर के पदाधिकारियों के वेतन निर्धारण पर सुझाव देने के लिए एक समिति गठित की थी। अब समिति के सुझाव आने वाले हैं। वैसे इस दौरान कई कंपनियों के प्रमुखों ने अपने स्तर पर वेतन व भत्तों में भारी कटौती करने का ऐलान किया है। बहरहाल, कारपोरेट मामलों के मंत्रालयों के सूत्रों का कहना है कि नए कंपनी विधेयक को संसद के अगले सत्र में लोकसभा में पेश करने की तैयारी है।