
नई दिल्ली। खंडपीठ में एक नए न्यायाधीश के साथ सुप्रीम कोर्ट ने अंबानी बंधुओं के बहुचर्चित गैस विवाद में गुरुवार को नए सिरे से सुनवाई शुरू की जिसमें दोनों पक्षों ने एक दूसरे पर अपनी पुरानी बात से मुकरने का आरोप लगाया।
रिलायंस इंडस्ट्रीज के वकील हरीश साल्वे ने नवगठित खंडपीठ के समक्ष बहस शुरू की। लेकिन अनिल अंबानी की आरएनआरएल की ओर से आए वरिष्ठ जेठमलानी ने उनकी बात काटी और मुकेश अंबानी की अगुवाई वाली रिलायंस इंडस्ट्रीज पर आरोप लगाया कि कंपनी बंबई हाईकोर्ट के समक्ष जो पक्ष रखा था उसके ठीक विपरीत बात यहां कर रही है।
जेठमलानी ने खंडपीठ से अनुमति मांगी की कि रिलायंस इंडस्ट्रीज के तर्को को काटने और अपना पक्ष रखने के लिए उन्हें हर दिन 30 मिनट दिए जाएं। उन्होंने कहा कि मुकेश अंबानी की कंपनी ने हाईकोर्ट के समक्ष जो बात कही, साल्वे ठीक उसके विपरीत जा रहे हैं।
हालांकि उनकी इस टोकाटाकी पर साल्वे ने आपत्ति जताई और कहा कि आरएनआरएल के वकील अपने आरोप में सही नहीं हैं और उन्हें टोकाटाकी से रोका जाना चाहिए। इस पर जेठमलानी ने कहा कि मैं तो अदालत की अनुमति से ही टोक रहा हूं।
न्यायालय ने जेठमलानी के आग्रह को दरकिनार करते हुए कहा कि उसे सभी पक्षों को अवसर देते हुए बहस सुननी है।
जेठमलानी ने इससे पहले सरकार पर मुकेश अंबानी के साथ सांठगांठ का आरोप लगाया था। उन्होंने कहा, कि आरआईएल का सरकार के साथ नया गठजोड़ हो गया है।
साल्वे ने कहा कि वे इस तरह की टोकाटाकी से सहमत नहीं हैं। उन्होंने न्यायालय से कहा कि वे बिना टोकाटाकी के अपना पक्ष रखना चाहते हैं क्योंकि यह महत्वपूर्ण मामला है।
उल्लेखनीय है कि रिलायंस इंडस्ट्रीज के केजी बेसिन गैस की आपूर्ति और कीमत को लेकर अंबानी बंधुओं में कानूनी लड़ाई चल रही है। अनिल अंबानी समूह का दावा है कि चार वर्ष पूर्व अंबानी घराने में बंटवारे के समय दोनों पक्षों के बीच हुए समझौते के तहत उन्हें रिलायंस इंडस्ट्रीज की केजी बेसिन के डी6 खंड की परियोजना से सस्ती दर पर गैस खरीदने का अधिकार है। इसके विपरीत आरआईएल का कहना है कि वह सरकार के साथ वहां के उत्पादन में भागीदारी के समझौते से बंधी हुई है लिहाजा अनिल समूह की कंपनी आरएनआरएल की मांग माने जाने लायक नहीं है।
इससे पहले मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति केजी बालकृष्णन की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय समिति के सदस्य न्यायमूर्ति आर वी रविंद्रन ने कल अपने को सुनवाई से अलग कर लिया। उनके स्थान पर न्यायाधीश पी सतशिवम को पीठ में शामिल किया गया है। इसके साथ इस नवगठित पीठ ने आज इस मामले की नए सिरे से सुनवाई शुरू की।
न्यायमूर्ति रवींद्रन ने अपने को सुनवाई से यह कहते हुए अलग किया कि उनकी बेटी बेंगलूर की एक विधि परामर्श कंपनी में काम करती है और वह कंपनी मुकेश अंबानी के नेतृत्ववाली रिलायंस इंडस्ट्रीज को एक अन्य मामले में सलाह दे रही है।