नई दिल्ली [जागरण ब्यूरो]। मुनाफा कमाने वाले सार्वजनिक उपक्रमों [पीएसयू] में 10 फीसदी निवेश का फैसला शेयर बाजार की तस्वीर ही बदल देगा। इससे न सिर्फ पूरे शेयर बाजार का बाजार पूंजीकरण बढ़ेगा, बल्कि पीएसयू का बाजार पर दबदबा भी बढ़ जाएगा।
बाजार पूंजीकरण के लिहाज से आज भी शेयर बाजार पर सरकारी कंपनियां ही हावी हैं। ताजा आंकड़ों के मुताबिक बाजार पूंजीकरण के लिहाज से सबसे बड़ी 10 कंपनियों में 6 सार्वजनिक क्षेत्र की हैं। जबकि शीर्ष छह कंपनियों में पांच सरकारी हैं। बाजार मूल्य में रिलायंस इंडस्ट्रीज पहले नंबर पर है। लेकिन उसके बाद ओएनजीसी, एमएमटीसी, एनटीपीसी, एसबीआई और एनएमडीसी ने इस सूची पर कब्जा किया हुआ है। दसवें स्थान पर भारत हैवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड है। रिलायंस के अलावा निजी क्षेत्र की जो तीन कंपनियां टाप-10 की सूची में शामिल हैं, उनमें इन्फोसिस, टीसीएस और भारती एयरटेल शामिल हैं।
ऐसे में अगर विनिवेश की नई नीति के मुताबिक मुनाफा कमाने वाली जो सरकारी कंपनियां विनिवेश की कतार में हैं, वे भी बाजार में लिस्ट हो जाती हैं तो इनका बाजार मूल्य करीब सवा तीन लाख करोड़ रुपये और बढ़ जाएगा। शेयर बाजार के जानकारों का मानना है कि ऐसा हो जाने के बाद शेयर बाजार पर पीएसयू का दबदबा और बढ़ जाएगा। अभी सार्वजनिक क्षेत्र की करीब 12 कंपनियां ऐसी हैं, जिनमें सरकार की हिस्सेदारी 90 प्रतिशत से ज्यादा है। नई नीति के तहत सरकार अब इन सभी कंपनियों में अपनी अतिरिक्त हिस्सेदारी घटाएगी। इनमें हिंदुस्तान कापर, एचएमटी, एमएमटीसी, नेशनल फर्टिलाइजर और एसटीसी जैसी कंपनियां शामिल हैं।
हाल में एनएचपीसी व आयल इंडिया जैसी कुछ पीएसयू का इश्यू लाने के बाद सरकार अब सेल, एनएमडीसी और कोल इंडिया में विनिवेश के प्रस्तावों पर विचार कर रही है। चालू वित्त वर्ष 2009-10 समाप्त होते-होते अथवा अगले वित्त वर्ष की शुरूआत में इन कंपनियों में विनिवेश हो जाने की उम्मीद है। हालांकि विश्लेषकों का अनुमान है कि सार्वजनिक क्षेत्र की जिन 12 कंपनियों में सरकार की हिस्सेदारी 90 प्रतिशत से ज्यादा है, उनके विनिवेश से सरकार को 30 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा मिलेंगे।