
वाशिंगटन। अमेरिकी अर्थव्यवस्था भले ही मंदी से उबर गई है, लेकिन बढ़ती बेरोजगारी की समस्या इस महाशक्ति के सामने अभी भी सुरसा की तरह मुंह बाए खड़ी है। महीने दर महीने यहां बेरोजगारी बढ़ रही है। आलम यह है कि अक्टूबर में यहां बेरोजगारी की दर 10.2 फीसदी पर पहुंच गई। यह बीते 26 साल का सबसे ऊंचा स्तर है। सितंबर में यह दर 9.8 फीसदी थी। बीते कुछ महीनों की तरह ही बीते महीने में भी लागत घटाने के नाम पर कंपनियों ने कर्मचारियों की छंटनी जारी रखी। विश्व की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था वाले देश में सबसे अधिक छंटनी निर्माण, मैन्यूफैक्चरिंग व खुदरा क्षेत्रों में हुई। दिसंबर 2007 में मंदी की शुरुआत होने से अमेरिका में बेरोजगारों की संख्या 82 लाख तक पहुंच चुकी है।
अमेरिकी श्रम विभाग के मुताबिक अक्टूबर में एक लाख 90 हजार लोगों ने अपनी नौकरी गंवाई। इससे समीक्षाधीन अवधि के लिए बेरोजगारी की दर अप्रैल 1983 के बाद सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गई। विश्लेषकों को भी अक्टूबर में बड़ी संख्या में नौकरियां कम होने का अंदेशा था। लेकिन मौजूदा आंकड़े उनके अनुमान को भी पीछे छोड़ गए। अर्थशास्त्रियों ने एक लाख 75 हजार नौकरी खत्म होने का अनुमान लगाया था। कुछ तो यहां तक मानते हैं कि अगले साल अमेरिका में बेरोजगारी की दर 10.5 फीसदी तक पहुंच जाएगी। इसकी वजह यह है कि नियोक्ता अभी भी आर्थिक रिकवरी को लेकर सशंकित हैं।
बहरहाल, ताजा आंकड़ों से यह जरूर साफ हो जाता है कि यहां श्रम बाजार पर अभी भी दबाव बना हुआ है। बीते सप्ताह जारी आंकड़ों में जुलाई और सितंबर के बीच अमेरिका के सकल घरेलू उत्पाद [जीडीपी] यानी विकास दर में 3.5 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई थी। इसके साथ ही बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में केवल ब्रिटेन ही बचा, जिसे आर्थिक सुस्ती से उबरना रह गया। इससे पहले चीन, जापान, जर्मनी और फ्रांस की विकास दर में भी बढ़ोतरी दर्ज की जा चुकी है।