बर्लिन। यूनान द्वारा खुद को दिवालिया होने से बचाने के लिए पारित किए गए नए मितव्ययता पैकेज को पारित किए जाने का यूरोपीय सरकारों और नेताओं ने स्वागत किया है। इसके साथ ही यूरोपीय सरकारों और नेताओं ने स्पष्ट कर दिया है कि यूनान को राहत पैकेज या बेलआउट उसी स्थिति में मिलेगा, जब वह यूरोपीय संघ और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष [आईएमएफ] की उन सभी शर्तो को पूरा करेगा, जिन पर उसने सहमति दी है।
जर्मनी की चांसलर एंजेला मार्केल ने रविवार रात को यूनानी संसद में पारित इस कड़े प्रस्ताव को काफी महत्वपूर्ण बताया है। दो साल पुराने यूनान ऋण संकट को दूर करने के लिए उठाए गए इस कदम का हालाकि हिंसक विरोध हो रहा है।
मार्केल ने कल बर्लिन में पत्रकारों से कहा कि जनता के भारी विरोध के बावजूद यूरोपीय संघ और आईएमएफ की शर्तो में किसी तरह की ढील नहीं दी जाएगी। इन उपायों पर ईयू के 'ट्रायका' निरीक्षकों, आईएमएफ, यूरोपीय केंद्रीय बैंक और यूनान सरकार के बीच वार्ता हुई है। यूनान के ऋण के बोझ को 2020 तक सकल घरेलू उत्पाद के 120 प्रतिशत पर लाने के लिए ए उपाय जरूरी हैं। मार्केल ने कहा कि इन उपायों से यूनान पूंजी बाजार में लौट सकता है और साथ ही प्रतिस्पर्धा बढ़ाकर आर्थिक वृद्धि को तेज कर सकता है।
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