संपादकीय

विश्व स्वच्छता दिवस पर पढ़ने के लिए जो संकल्प पत्र तैयार किया गया, उसके अनुसार व्यक्ति को जीवन के प्रत्येक कार्यकलाप में स्वच्छता का वादा करना है। बात सिर्फ सही स्थान पर कूड़े फेंकने और जलवायु एवं पर्यावरण की रक्षा के लिए सक्रिय होने की नहीं है।...
हमारी कथनी-करनी में बहुत अंतर है। हम कहते कुछ और हैं, लेकिन करते कुछ और। दावा करते हैं पर्यावरण संरक्षण का, लेकिन संरक्षण तो दूर रहा, जो है भी, उसे हम नष्ट कर रहे हैं। आवरण का कोई न कोई लबादा ओढ़कर हम दायित्व से विमुख हो रहे हैं। कथनी-करनी में...
चर्चा में रहने वाले हरियाणा के सरकारी स्कूलों का एक और कारनामा सामने आया है। खंड और जिला स्तर पर स्कूलों में सांस्कृतिक कार्यक्रम करवाए ही नहीं गए। जबकि उनके नाम पर लाखों का बजट आया था। यह राशि किस मद में खर्च हुई, जांच का विषय है। फर्जीवाड़ा करने...
यह या तो संवेदनहीनता है या फिर समस्याओं से मुंह फेरने की भारतीय प्रवृत्ति कि देश में मार्ग दुर्घटनाओं में मरने और घायल होने वाले लोगों की संख्या विश्व में सबसे अधिक होने के बावजूद न तो केंद्र सरकार के स्तर पर कोई हलचल है और न ही राज्यों के स्तर...
महंगाई से कराहती दिल्ली में सस्ता आटा बेचने की दिल्ली सरकार की घोषणा सराहनीय है। इसके साथ सरकार को सुनिश्चित करना चाहिए कि सस्ता आटा वास्तविक जरूरतमंदों तक पहुंच सके। इस सच्चाई से कोई इनकार नहीं कर सकता है कि आटा, गेहूं से लेकर रोजमर्रा की जरूरत...
आम आदमी की प्राय: शिकायत होती है कि सरकारी विभागों में उसकी सुनवाई नहीं होती है। शिकायतों और समस्याओं के समाधान के लिए कार्यालयों में आने वाले लोग इधर से उधर घूमते रहते हैं। व्यस्तता के कारण वरिष्ठ अधिकारी मिल नहीं पाते। अथवा उनकी अनुपस्थिति के...
विकास के कई पैमाने पर लगातार पिछड़े बिहार के लिए केंद्र से विशेष राज्य का दर्जा पाने के कई ठोस तर्क हैं। इसके बावजूद प्रदेश की पहली आधिकारिक यात्रा पर आये योजना आयोग के उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह अहलूवालिया ने इस मसले पर निराश किया है। उनका मानना है...
उत्तराखंड में सरकारी महकमों का रवैया चिंताजनक है। विकास योजनाएं हों या फिर बाकी काम, सभी बेहद सुस्त चाल से आगे सरक रहे हैं। बजट इस्तेमाल तो निराशा का भाव पैदा कर रहा है। हालात बदतर होते जा रहे हैं। वह भी तब जबकि राज्य सरकार पूरे साल बजट की कमी का...
उत्तर प्रदेश सरकार ने जल संस्थानों की पाइपलाइन से चोरी-छिपे पानी लेने को संज्ञेय अपराध घोषित करने की जो तैयारी की है उससे उद्देश्य की पूर्ति हो सकेगी, इसमें संदेह है। इसमें संदेह नहीं कि जल संस्थानों की वित्तीय स्थिति खराब है, लेकिन यदि वे जल...
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