कूपन पर राशन-किरासन

 
May 15, 11:14 pm

गरीबी रेखा से नीचे रहने वालों की पहचान के लिए सरकार ने 13 सूत्री मापदंड तय किए थे। यह माना गया था कि इसके बाद बीपीएल कार्ड में छेड़खानी नहीं होगी, लेकिन स्थिति बदली नहीं। केंद्र सरकार के आंकड़ों के अनुसार देश में करीब सात करोड़ परिवार गरीबी रेखा के नीचे हैं, जबकि राशन कार्ड 10 करोड़ से ज्यादा बांटे गए हैं। यानी, तीन करोड़ लोग गलत तरीके से गरीबों के हक में सेंध लगाने के लिए तैयार हैं। उधर मापदंड पर खरे उतरने वाले वास्तविक गरीब राशन कार्ड के अभाव में न तो सार्वजनिक वितरण प्रणाली का लाभ उठा पाते हैं और न ही इंदिरा आवास का सपना सच कर सकते हैं। बिहार सरकार ने जाली राशन कार्ड की समस्या को चुनौती के रूप में लिया है। 29 मार्च को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने दरभंगा में कहा था कि लोगों को राशन किरासन कूपन शीघ्र मिलेगा। इसके वितरण की ऐसी व्यवस्था की जा रही है, जिसमें न सिर्फ खाद्यान्न व किरासन का उठाव होगा, बल्कि यह लोगों के पास हथियार के समान होगा और कालाबाजारी पर रोक लगेगी। उनके एलान के लगभग डेढ़ माह बाद सरकार ने कहा कि जन वितरण प्रणाली की दुकानों के मार्फत मिलने वाले राशन-किरासन के लिए राज्य में कूपन वितरण का कार्य अगले हफ्ते शुरू होगा। हर हाल में कूपन 31 मई तक बंट जाएंगे और जून से राशन वितरण की नई व्यवस्था लागू हो जाएगी। जिलों में कूपन पहुंचने की अंतिम तारीख भी तय है। मुखिया व डीलर को इस बार कूपन बांटने के लिए नहीं दिया जायेगा। यह काम जिले के किसी अधिकारी-कर्मचारी के पर्यवेक्षण में किया जाएगा। आरोप और शिकायतों के अब तक प्रकाश में आए मामलों को ध्यान में रख कर सरकार ने कूपन वितरण में मुखिया की जिम्मेदारी सीमित कर दी है। अब वे कूपन बंटवाएंगे, खुद नहीं बांटेंगे। कूपन बांटने का दायित्व संबंधित पंचायत के लिए तैनात पर्यवेक्षक को सौंपा गया है। कूपन बांटने के सात दिन पूर्व संबंधित पंचायत व गांव में सूचना दी जायेगी। छपे कूपन सीधे जिलों को मिल रहे हैं, जहां उन्हें स्ट्रांग रूम में रखा गया है। राज्य में नये राशन कार्ड भी बंटने हैं। बिहार टेक्स्ट बुक कारपोरेशन को राशन कार्ड छपाई का दायित्व है, हालांकि राशन कार्ड के अभाव में सामग्री का वितरण प्रभावित नहीं होगा। जब तक कार्ड नहीं बंटेंगे तब तक कूपन काम आएंगे। इसके लिए पारिवारिक सूची की एक प्रति डीलर को भी दी जायेगी। यानी, घपले करने वाले यदि डाल-डाल चले हैं (या हर डाल पर बैठे हैं) तो उन्हें नाकाम कर गरीबों का भला करने के लिए सरकार पात-पात चलना चाहती है।

सिवान की डीएम सुश्री वंदना प्रेयसी ने तो हाल में आपूर्ति विभाग से संबंधित योजनाओं की समीक्षा के दौरान विभागीय पदाधिकारियों को कई कठोर निर्देश दिए। इसके मुताबिक खाद्यान्न का न तो विचलन होना चाहिए और न ही लैप्स होना चाहिए। देखना यह है कि इतनी सख्ती के बाद भी सस्ता अनाज गरीब की थाली तक पहुंच पाता है या नहीं।

[स्थानीय संपादकीय: बिहार]




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