युवा शक्ति का यदि दुरुपयोग होने लगे तो इसके परिणाम भयंकर होते हैं। हरियाणा में कई ऐसे मामले सामने आए हैं जब छात्रों को बहका कर अपने स्वार्थ की पूर्ति के लिए उनका इस्तेमाल किया गया है। शैक्षणिक और रचनात्मक कार्यो में समय अधिक बिताने के बजाय वे छोटे-छोटे मुद्दों पर भिड़ने लगेंगे तो जीवन के अहम लक्ष्य से भटक जाएंगे। कुछ दिन पहले कुरुक्षेत्र में पकड़े गए एक गिरोह में एक इंजीनियरिंग और एक एमबीए का छात्र पाया गया। करियर की दृष्टि से दोनों ही क्षेत्रों में जाने वाले छात्रों को बड़े सम्मान से देखा जाता है। किसी को आभास भी नहीं होगा कि इन विषयों के छात्र भी अपराध के दलदल में फंस सकते हैं। बृहस्पतिवार को कैथल के छात्रों में हुए खूनी संघर्ष में दो छात्र नेताओं को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा। इसका कारण था कंप्यूटर सेंटर पर कब्जे का विवाद। यह इतना बड़ा विवाद भी नहीं था, जिसे आपस में मिल बैठकर सुलझाना कठिन था। लगता है कि दोनों तरफ से भिड़ने की पूरी तैयारी की गई थी। अन्यथा हथियारों से लैस होने और अखाड़ों से कुछ लोगों को लाने की क्या आवश्यकता थी। हथियार पास हों तो स्वभाव को नियंत्रित रखना बहुत कठिन होता है। यही कारण रहा दो गुटों की तकरार बढ़ने का।वे तय करके ही आए थे कि सेंटर पर कब्जा करना ही है। आवेश में हथियार निकाल लिए गए और गोली भी चलाई गई। यूं तो पुलिस के सतर्क होने के दावे किए जाते हैं, लेकिन क्या खुफिया एजेंसियों को इस विवाद की भनक नहीं लग पाई। जहां यह भिड़ंत हुई वह सुनसान नहीं बल्कि भीड़-भाड़ वाला इलाका था।
स्कूली शिक्षा के बाद छात्र उच्च शिक्षा के लिए कालेज में प्रवेश लेते हैं। वहां से बाहर निकलने वाले छात्र अपने करियर के लक्ष्य को पाने के लिए जुट जाते हैं। यह सही है कि कालेज का वातावरण स्कूल से भिन्न होता है। परिपक्व हो रहे छात्रों पर स्कूल की भांति कई पाबंदियां नहीं होती हैं। फिर भी छात्रों को अपनी हर गतिविधि में अनुशासित ही रहना चाहिए। कैथल में भड़की प्रतिशोध की आग ने दो माताओं की गोद को सूना कर दिया है। अपने युवा बेटों के बारे में उन्होंने जो सपने संजोए थे, सब बिखर गए। इन परिवारों को जो क्षति हुई है उसे कौन पूरा करेगा।
[स्थानीय संपादकीय: हरियाणा]