वाजिब चिंता

 
Sep 07, 12:34 am

उत्तराखंड के औली में अगले साल प्रस्तावित सैफ विंट गेम्स को लेकर राज्य सरकार का चिंतित होना स्वाभाविक है। यह सौभाग्य का विषय है कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर के इस आयोजन की पहली मेजबानी उत्तराखंड को मिली है। इसमें करीब दर्जनभर देश प्रतिभाग करेंगे। वैसे तो यह आयोजन इस साल होना था, लेकिन आयोजन पर होने वाले खर्च को लेकर केंद्र और राज्य सरकार के बीच एकराय न बन पाने के कारण समय पर फैसला नहीं हो पाया था। आखिरकार बाद में केंद्र की समझ में आया और उसने राज्य सरकार को आर्थिक मदद देने की बात कही। इससे राज्य सरकार की बड़ी मुश्किल एक झटके में हल तो हो गई, लेकिन इतने भर से सब कुछ नहीं होने वाला। विंटर गेम्स कराने के लिए सरकार को औली के साथ ही देहरादून में बुनियादी सुविधाएं जुटानी हैं। दून में तकरीबन ढाई हजार की क्षमता का आइस स्कैटिंग रिंग बनना है, जबकि औली में तकरीबन 1300 मीटर का स्लोप तैयार किया जाना है। कुछ मशीनें विदेश से खरीद कर स्थापित की जानी है। चूंकि राज्य सरकार पहली मर्तबा इतना बड़ा आयोजन हाथ में ले रही है, उसकी तैयारियों भी उतने ही अच्छे ढंग से की जानी चाहिए। अगर आयोजन में कोई बड़ी खामी रह जाती है तो बाहरी देशों के सामने सूबे की छवि खराब हो सकती है। अच्छी बात यह कि राज्य सरकार इसके प्रति संवेदनशील नजर आ रही है। यहां तक कि मुख्यमंत्री खुद पूरे मामले को अपने स्तर से देख रहे हैं। इस बाबत प्रमुख सचिव को हर हफ्ते समीक्षा करने का फरमान दिया गया है। बारिश की वजह से कार्य की गति धीमी पड़ने पर मुख्यमंत्री ने नाराजगी जताकर अपने इरादे स्पष्ट कर दिए हैं। उन्होंने आयोजन की तैयारियों से लिए कट आफ डेट तय करके यह भी साफ कर दिया कि सरकार इसे हल्के ढंग से नहीं ले रही है। निश्चित तौर पर यह अच्छा संकेत है। दरअसल, सैफ विंटर गेम्स का सफल आयोजन न केवल दूसरे देशों में उत्तराखंड का नाम रोशन करने में मददगार साबित होगा, बल्कि उत्तराखंड के लिए बड़ी उपलब्धि होगा। वह इस मायने में इन खेलों के लिए जो बुनियादी ढांचा तैयार किया जाएगा, वह यहां खेल के विकास में सहायक सिद्ध होगा। ऐसे में सरकार की चिंता वाजिब है। आयोजन जितना अच्छा होगा, सूबे को भविष्य में इसका उतना ही अधिक फायदा होगा।

[स्थानीय संपादकीय: उत्तराखंड]




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