फिर वही संकट

 
Sep 07, 12:34 am

उत्तर प्रदेश के सभी उद्योगों की बिजली आपूर्ति रात में बंद रखने का पावर कारपोरेशन का आदेश एक बार फिर इसकी पुष्टि कर रहा है कि पिछले एक वर्ष में बिजली संकट के निदान के कोई विशेष प्रयास नहीं किए गए। बिजली संकट से निपटने के लिए यदि कुछ किया गया होता तो पावर कारपोरेशन को एक ऐसे समय रात में उद्योगों को बिजली आपूर्ति न करने का निर्देश नहीं देना पड़ता जब गर्मी के बाद वर्षा ऋतु भी समाप्ति की ओर है। चिंताजनक केवल यही नहीं है कि बिजली संकट के समाधान के लिए कोई तात्कालिक उपाय नहीं किए गए, बल्कि यह भी है कि दीर्घकालिक उपाय भी होते नजर नहीं आते। जिन उपायों का भरोसा दिलाया भी जा रहा है वे परवान चढ़ते नजर नहीं आते। यह निराशाजनक है कि आम जनता को बिजली की किल्लत से मुक्ति दिलाने के लिए विगत में जो भी प्रयास किए गए उन्हें अंजाम तक नहीं ले जाया जा सका। राज्य सरकार और पावर कारपोरेशन तीन-चार वर्ष बाद बिजली संकट समाप्त होने का आश्वासन भले ही दें, लेकिन इसमें संदेह है कि उत्पादन और वितरण के पूरे ढांचे में आमूल-चूल बदलाव लाए बिना बिजली की किल्लत से राहत मिल सकेगी।

यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि बिजली संकट को समाप्त करने के लिए न तो पिछली सरकार में कोई ठोस प्रयास किए जा सके और न ही मौजूदा शासन में ऐसा कुछ होता नजर आ रहा है। उत्तर प्रदेश को बिजली उत्पादन के मामले में आत्मनिर्भर बनाने के लिए जो कुछ जरूरी है वह तो किया ही नहीं जा रहा, ऐसे कदम भी नहीं उठाए जा रहे जिससे उत्पादन का मौजूदा ढांचा दुरुस्त हो सके। यह आश्चर्यजनक है कि राज्य में बिजली संकट पिछले कई वर्षो से जारी रहने के बावजूद बिजली संयंत्रों का सही तरह रख-रखाव नहीं हो पा रहा है। परिणाम यह है कि ये संयंत्र अपनी क्षमता के मुताबिक बिजली का उत्पादन नहीं कर पा रहे हैं। रही-सही कसर बड़े पैमाने पर बिजली की चोरी और लाइन हानियों के ऊंचे प्रतिशत ने पूरी कर दी है। बिजली की मांग और आपूर्ति में अंतर जिस तरह बढ़ता जा रहा है उससे यह उम्मीद करना कठिन है कि सर्दियों में बिजली संकट से कोई राहत मिल सकेगी।

[स्थानीय संपादकीय: उत्तर प्रदेश]




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