दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (डूसू) के चुनाव परिणाम इस बार थोड़े अटपटे है। भाजपा की छात्र शाखा अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की नुपुर शर्मा, इस बार कांग्रेस के छात्र संगठन एनएसयूआई की सोनिया सप्रा को हराकर अध्यक्ष चुनी गई है। जबकि उपाध्यक्ष, सचिव एवं सहसचिव पदों पर एनएसयूआई का कब्जा बरकराररहा है। इन चुनाव नतीजों को लेकर सभी की अलग-अलग राय हो सकती है। यह नुपुर शर्मा के आकर्षक व्यक्तित्व व कामकाज की दृष्टि से उनकी निजी जीत है अथवा संगठन के एकजुट प्रयास की है, यह आकलन करना इतना आसान नहीं है। एनएसयूआई ने अध्यक्ष पद खोकर इन चुनावों में क्या खोया, क्या पाया? इसका विश्लेषण सभी अपने-अपने ढंग से करेगे। मगर इतना तय है कि बदले हुए हालात में एबीवीपी क ी अध्यक्ष को अपने परंपरागत विरोधी दल के निर्वाचित उपाध्यक्ष, सचिव एवं सहसचिव के साथ संतुलन व समन्वय बनाना होगा। अध्यक्ष के नाते नुपुर शर्मा के सामने यह एक बड़ी चुनौती होगी।
हालांकि निवर्तमान डूसू अध्यक्ष अमृता बाहरी को उनके कार्याकाल के लिए दौरान किए गए कई अहम कार्यो के लिए याद किया जाएगा। इनमें सबसे अहम है, पुलिस एवं डूसू प्रशासन के सहयोग से विश्वविद्यालय कैंपस को नो-स्मोकिंग जोन बनाना। दूसरा कार्य-छात्राओं से छेड़छाड़ रोकने के लिए कैंपस में पुलिस प्रशासन की मदद से सीसीटीवी कैमरे लगवाने की पहल करना। हालांकि अभी इस पर अमल होना है। यह देखना कम दिलचस्प नहीं होगा कि एबीवीपी की नई डूसू अध्यक्ष, अमृता बाहरी के इन फैसलों को पलटती है, या जारी रखती हैं, क्योंकि, वे चुनाव प्रचार के दौरान नो स्मोकिंग जोन की यह कहकर आलोचना कर चुकी है कि यह व्यक्ति की स्वछंदता के अनुकूल नहीं है। ऐसे अनेक प्रसंग अब सामने आएंगे, पर यह देखना कम दिलचस्प नहीं होगा कि नुपुर शर्मा किस प्रकार अपने और एबीवीपी के एजेंडे पर अमल करेगी? क्योंकि शेष तीनों महत्वपूर्ण पदों पर प्रतिपक्ष के पदाधिकारी आसीन होंगे?
[स्थानीय संपादकीय: दिल्ली]