चिदंबरम की चेतावनी

केंद्रीय गृहमंत्री पी चिदंबरम ने मदुरै में पाकिस्तान को दो टूक शब्दों में यह जो चेतावनी दी कि यदि मुंबई हमले सरीखी हरकत फिर हुई तो जवाबी कार्रवाई होगी उसके लिए उन्हें बधाई दी जानी चाहिए। यह एक ऐसी कठोर चेतावनी है जो देश की जनता का मनोबल बढ़ाने और शत्रुवत व्यवहार पर आमादा पाकिस्तान को आगाह करने वाली है। यह संभवत: पहली बार है जब भारत के किसी सत्तारूढ़ राजनेता ने पाकिस्तान को उस भाषा में ललकारा है जो उसे समझ आती है। खास बात यह है कि चिदंबरम की चेतावनी देशवासियों में भरोसे का संचार करने वाली तो है ही, पाकिस्तान पोषित आतंकवाद से लड़ने एवं उसे परास्त करने की उनकी प्रतिबद्धता का परिचायक भी है। यह शुभ संकेत है कि पाकिस्तान ने चिदंबरम की चेतावनी पर तत्काल प्रतिक्रिया व्यक्त की। इसका अर्थ है कि गृहमंत्री की फटकार ने असर दिखाया है। दरअसल पाकिस्तान ही नहीं दुनिया को यह पता चलना चाहिए कि भारत अनंतकाल तक धैर्य की परीक्षा नहीं दे सकता। यह ठीक है कि विगत में भी भारत की ओर से पाकिस्तान को मुंहतोड़ जवाब देने की बातें की गईं, लेकिन जिन्होंने ऐसा कहा उन्होंने उसके अनुरूप आचरण नहीं प्रदर्शित किया। रही-सही कसर उनके ढुलमुल रवैये ने पूरी कर दी।

भले ही चिदंबरम ने अनिच्छा पूर्वक गृहमंत्रालय संभाला हो, लेकिन उन्होंने गृहमंत्री के रूप में एक वर्ष से भी कम समय में यह सिद्ध किया है कि वह आंतरिक सुरक्षा के समक्ष उपस्थित हर खतरे का सामना करने के लिए न केवल तैयार हैं, बल्कि आवश्यक प्रबंध भी कर रहे हैं। धीर-गंभीर छवि वाले गृहमंत्री की चेतावनी से यह स्पष्ट है कि पाकिस्तान अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहा है और सीमा पार प्रायोजित आतंकी हमलों का खतरा बरकरार है। चूंकि पाकिस्तान को चेताने का काम खुद चिदंबरम ने किया है इसलिए इसके प्रति आश्वस्त हुआ जा सकता है कि यदि भविष्य में आतंकी वारदात के रूप में फिर कोई अनहोनी होती है तो भारत केवल शाब्दिक गर्जन-तर्जन तक सीमित नहीं रहेगा। अब पाकिस्तान की हरकतों पर संयम का परिचय देने का कोई मतलब नहीं। आवश्यकता से अधिक संयम कमजोरी को ही प्रदर्शित करता है। पाकिस्तान ने अपने आचरण से यह साबित करने का ही काम किया है कि वह न तो मुंबई हमले के षड्यंत्रकारियों को दंडित करने का इरादा रखता है और न ही उन आतंकियों पर लगाम लगाने का जो भारत के लिए खतरा बने हुए हैं। चिदंबरम के बयान पर पाकिस्तान ने जो नाराजगी जाहिर की उस पर ध्यान देने का कोई मतलब नहीं। सच तो यह है कि पाकिस्तान भारत के लिए खतरा बने आतंकवाद से लड़ने के जो भी आश्वासन दे रहा है उन पर यकीन करने का अर्थ है खुद को धोखे में रखना। यह सही समय है जब पाकिस्तान के प्रति न केवल सख्ती दिखाई जाए, बल्कि हरसंभव तरीके से उसकी उपेक्षा भी की जाए, क्योंकि उसने अपनी हरकतों से दुनिया के साथ-साथ खुद को खतरे में डाल रखा है। इस संदर्भ में एक हद तक राहुल गांधी का यह कहना सही है कि हम भारतीय पाकिस्तान पर आवश्यकता से अधिक ध्यान दे रहे हैं। यह सही समय है जब भारत पाकिस्तान की उपेक्षा करना भी सीखे। नि:संदेह भारत की उपेक्षा भी पाकिस्तान को बहुत महंगी पड़ सकती है, बशर्ते इस मामले में परंपरागत ढुलमुलपन का परिचय न दिया जाए।

[मुख्य संपादकीय]




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