उत्तर प्रदेश के गोंडा में मानव रहित क्रासिंग पर ट्रेन और ट्रक की टक्कर के लिए प्रत्यक्ष रूप से रेल प्रशासन दोषी नजर आ रहा है। स्थानीय रेल प्रशासन को इससे अवगत होना ही चाहिए था कि कार्तिक पूर्णिमा मेले पर यात्रियों की भारी भीड़ उमडे़गी। यह आश्चर्यजनक है कि कार्तिक पूर्णिमा मेले के लिए अतिरिक्त ट्रेनें चलाने के बारे में क्यों नहीं सोचा गया? जब इस दुर्घटना के संदर्भ में सभी यह मान रहे हैं कि रेलवे से भूल हुई है तब यह भी देखा जाना चाहिए कि राज्य सरकार ने अपने स्तर पर कोई व्यवस्था क्यों नहीं की? कम से कम उसे इस तथ्य से अच्छी तरह अवगत होना चाहिए कि इस मेले के लिए यात्रियों की भारी भीड़ उमड़ेगी और उनके लिए आवागमन के समुचित प्रबंध होने चाहिए। इस दुर्घटना के संदर्भ में जब रेलवे को दोषी ठहराते हुए उच्च स्तरीय जांच की मांग की जा रही है तब राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन की भूमिका की जांच की मांग भी उठनी चाहिए। गोंडा में हुए हादसे की वजह मानव रहित क्रासिंग है, लेकिन यह भी स्पष्ट नजर आ रहा है कि यदि रेलवे और स्थानीय प्रशासन के स्तर पर जरूरी इंतजाम किए गए होते तो संभवत: एक दर्जन से अधिक लोगों को अपनी जान से हाथ नहीं धोना पड़ता।
यह पहला मामला नहीं जब किसी विशेष आयोजन पर लोगों के लिए आवश्यक सुविधाओं की अनदेखी की गई हो। आम तौर पर स्थानीय स्तर पर होने वाले उत्सवों के लिए जरूरी इंतजाम मुश्किल से ही किए जाते हैं। यही कारण है कि ऐसे अनेक अवसर श्रद्धालुओं और अन्य लोगों के लिए परेशानी पैदा करने का काम करते हैं। बसों-ट्रेनों में भारी भीड़ होने के अतिरिक्त लोगों को जगह-जगह अनेक तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता। कभी-कभी ऐसी परेशानियां हादसों में भी बदल जाती हैं। समस्या यह है कि सार्वजनिक स्थलों पर उमड़ने वाली भारी भीड़ और अव्यवस्था के चलते होने वाले हादसों से कहीं कोई सबक नहीं सीखा जाता। यह निराशाजनक है कि आम तौर पर ऐसे आयोजनों पर स्थानीय प्रशासन की ओर से कुछ सिपाही तैनात कर कर्तव्य की इतिश्री कर ली जाती है और कभी-कभी तो ऐसी जरूरत भी नहीं महसूस की जाती।
[स्थानीय संपादकीय : उत्तर प्रदेश]