उत्तरी हरियाणा बिजली वितरण निगम ने एक अहम निर्णय करके आम जनता को राहत देने की पहल की है। इस निर्णय के अनुसार अब विभिन्न अदालतों में लंबित सभी प्रकार के बिजली संबंधी मामलों को लोक अदालतों के जरिए निपटाया जाएगा। इस योजना में बिजली चोरी के मामलों को विशेष तवज्जो दी जाएगी। हालत यह है कि पूरे राज्य की जनता बिजली समस्या से परेशान है। अब तक बनी सरकारों ने इस समस्या से निजात दिलाने के लिए प्रयास किए हैं, लेकिन जनता की अपेक्षा के अनुसार बिजली आपूर्ति नहीं हो पाई। कई प्रयास करने के बावजूद प्रदेश में इसकी कमी बनी रही। बीच स्थिति सामान्य होती, तो कुछ समय पश्चात फिर वही हालत बन जाती। इसमें दो राय नहीं कि बिजली-पानी जैसी बुनियादी आवश्यकताएं पूरी करने में जो सरकार कामयाब रही, उसकी स्थिरता वर्षो तक बनी रहती है। यह सही है कि राज्य में आबादी बढ़ने के साथ औद्योगिक इकाइयों की संख्या में भी इजाफा हुआ है। इन्हीं इकाइयों की बदौलत आज हरियाणा में लाखों लोगों को रोजगार मिला है। यहां से निर्यात किए जा रहे उत्पादों के कारण विश्व में हरियाणा को सम्मानजनक स्थान मिला है। समय पर आर्डर पूरे होते रहें और उनकी गुणवत्ता बनी रहे, तभी यह सम्मान कायम रह सकता है। इसके लिए औद्योगिक इकाइयों को बिजली की निरंतर आपूर्ति होनी जरूरी है। अपनी फसलों से केंद्रीय पूल में बड़ा हिस्सा देने वाले प्रदेश के किसान भी बिजली के लिए चिंतित रहते हैं। उत्पादन बढ़ाने का दावा तो होता रहा, लेकिन आम जन को बिजली संकट के लिए सड़कों पर अपने गुस्से का इजहार क्यों करना पड़ा। भले बिजली आपूर्ति की शत-प्रतिशत मांग को पूरा करने में समय लग जाए, लेकिन बिजली जा कहां रही है इसकी पड़ताल होनी चाहिए। निगम के आदेश के अनुसार जब अधीक्षण अभियंता जब व्यक्तिगत तौर पर निरीक्षण करेंगे तो उन्हें पता चलेगा कि इस कृत्य में कितनी औद्योगिक इकाइयां भी संलिप्त हैं।लोक अदालतों से अपेक्षा है कि जितने लोगों पर जुर्माने की राशि बकाया है, पहले उसे वसूला जाए। बिजली विभाग की उदासीनता के कारण जो मामले अधर में हैं, उन्हें प्राथमिकता से निपटाया जाए। इसी से सुधार की उम्मीद बनेगी।
[स्थानीय संपादकीय : हरियाणा]