हरियाणा में दुष्कर्म की घटनाएं लगातार होना चिंतन का विषय है। समाज को कलंकित करने की इस दुष्प्रवृत्ति को जड़ से कैसे समाप्त किया जाए, इसके लिए गंभीर प्रयास क्यों नहीं किया जा रहा। पिछले दो दिनों में हिसार, पानीपत और फरीदाबाद में दो महिलाओं और एक दुधमुंही बच्ची के साथ दुष्कर्म किया गया। महिलाएं, विशेष रूप से बच्चियां कहीं सुरक्षित नहीं हैं। देखा जाए तो भीड़ वाले स्थानों पर भी वे असुरक्षा के भाव से ग्रसित रहती हैं। कुछ स्कूलों में अध्यापकों द्वारा छात्राओं की अस्मत से खिलवाड़ किया गया। आपराधिक तत्वों का दुस्साहस इतना बढ़ गया है कि गली में खेलती बच्ची या स्कूल से आती लड़कियों का अपहरण कर लिया जाता है। रात पति के साथ जा रही महिला सामूहिक दुष्कर्म का शिकार बनती है। समाज में सक्रिय इन भेड़ियों द्वारा कानून-व्यवस्था का खुलेआम मखौल उड़ाया जा रहा है। इन पर कब और कौन नकेल कसेगा। हिसार के गाव चूली खुर्द में आठ माह की बच्ची के साथ दुष्कर्म के आरोपी के परिवार को पंचायत ने गांव छोड़ने का फरमान सुना दिया है। सदमे से पीड़ित आरोपी के परिवार को अब कहीं गुमनामी के अंधेरे में जीवन गुजारना पड़ेगा।
इस फैसले को उचित ही ठहराया जाएगा। परिवार गांव में रहता तो लोगों के उलाहनों और टेढ़ी निगाहों के कारण उसका जीना मुश्किल हो जाता। अन्य सदस्य सिर उठाकर और किसी से नजर मिलाकर बात करने का साहस नहीं जुटा पाते। उसके द्वारा किए गए घिनौने कृत्य से जो आत्मग्लानि परिवार को होगी, वह सजा से कम नहीं है। पंचायत का फरमान दूसरों के नसीहत बनेगा। जो भी गलत कदम उठाएगा उसकी सजा केवल एक को नहीं पूरे परिवार को मिलेगी। बच्ची के साथ जो किया गया उसकी कड़े शब्दों में जितनी निंदा की जाए उतनी ही कम है। एक पल भी इस हैवान को मासूम बच्ची पर रहम नहीं आया। इस प्रवृत्ति के बढ़ने के लिए कौन दोषी है? फुटपाथ पर बिक रहा घटिया साहित्य, दुकानों पर बेची जा रही अश्लील फिल्मों की सीडी, नेट पर देखी जा रही आपत्तिजनक तस्वीरें, सुबह के शो में दिखाई जा रही फिल्में और बुरी संगत। इन्हीं से युवकों की मानसिकता दूषित हुई है।
[स्थानीय संपादकीय: हरियाणा]