शिक्षा के विस्तार के लिए जितने प्रयास किए जाएं अव्यवस्था के कारण बेअसर हो जाते हैं। विडंबना है कि सुविधाओं और शिक्षा के स्तर के बारे में हरियाणा के सरकारी स्कूल हमेशा चर्चा में रहे हैं। इन स्कूलों की छवि को सुधारने और शिक्षा में गुणवत्ता लाने के लिए दो वर्ष पूर्व यहां उपग्रह संचार प्रणाली से चलनी वाली एजुसेट व्यवस्था के माध्यम से शिक्षा देने की व्यवस्था की गई। वह अवसर गौरवान्वित होने का था। नई व्यवस्था से हरियाणा भी चुनिंदा राज्यों के समकक्ष हो गया। नई प्रणाली क्रियान्वित करने के अन्य उद्देश्य थे सभी छात्रों को समान शिक्षा मिले। वे निजी स्कूलों में पढ़ने वाले अन्य बच्चों की तुलना में स्वयं को अन्य कमतर नहीं आंके। दुर्भाग्यवश विपरीत परिस्थिति भी उत्पन्न हो गई। एजुसेट लगाने के बाद कुछ बुनियादी समस्याएं उभर कर सामने आई। इन पर गंभीरता से ध्यान नहीं दिया गया। जब तक समस्याएं दूर नहीं होंगी बेहतर परिणाम की अपेक्षा नहीं की जा सकती। प्रदेश भर के हजारों सरकारी स्कूलों में एजुसेट व्यवस्था की देखरेख करने वाला ही कोई नहीं है। प्रगति के बारे में जो आंकड़े उभर कर सामने आने चाहिए थे, वे नहीं मिल पाए। वस्तुस्थिति यह है कि अधिकांश सेट काम नहीं कर रहे। उन पर धूल की परतें चढ़ती जा रही हैं। विभाग ही बताए कि सफेद हाथी साबित हो रहे इन सेटों को चालू करवाने के लिए प्रबंध क्यों नहीं किया गया।
स्कूलों के एजुसेट संचालन की तकनीकी खामियों को दूर करने में विलंब करने का कारण स्पष्ट किया जाए। जिन सरकारी स्कूलों में एजुसेट काम नहीं कर रहे हैं वहां शिक्षा सुधार का परिणाम कैसे मिलेगा। एजुसेट के खराब होने के बारे किसे सूचित किया जाए, उन्हें कौन ठीक करने आएगा। इन सवालों के जवाब स्कूल के मुखिया के पास क्यों नहीं हैं। इस समस्या का निदान कैसे करवाना है उन्हें पूरी व्यवस्था की जानकारी होनी चाहिए। यही हाल रहा तो छात्रों को एजुसेट के माध्यम से पढ़ाए जाने वाले विषय व सिलेबस पूरा नहीं हो पाएगा। एक से अनुबंध समाप्त होने के बाद एजुसेट ठीक करने का नया ठेका किसी अन्य कंपनी को देना चाहिए था। तकनीकी खामी के कारण अधिकांश सरकारी स्कूलों में एजुसेट ठप पड़े है, उनकी कब सुध ली जाएगी।
[स्थानीय संपादकीय: हरियाणा]