मुंबई। अपने पिता के साथ अनफॉरगेटेबल वर्ल्ड टूर को अभिषेक बच्चन कई लिहाज से अविस्मरणीय मानते हैं। लंबे समय के बाद यह पहला मौका था जब परिवार के चारों सदस्यों ने काफी वक्त एक साथ गुजारा। और फिर बच्चन परिवार ने फिल्म इंडस्ट्री के अन्य स्टारों के साथ दर्शकों का साक्षात मनोरंजन किया। अभिषेक बच्चन के लिए आम दर्शकों के बीच स्टेज परफार्मेस का यह पहला अवसर था। वे बताते हैं कि शायद आप सभी जानते हों कि पापा ने ही वर्ल्ड टूर की शुरूआत की थी। मैंने अपने बचपन में उन्हें स्टेज पर परफॉर्म करते देखा है। इस बार उनकेसाथ परफॉर्म करने का मौका मिला। मैं बार-बार कहता हूं कि आप भूल जाएं कि मैं उनका बेटा हूं। मेरे लिए वे पापा तो हैं, लेकिन देश के सुपरस्टार भी हैं। उनके साथ स्टेज और स्क्रीन करना मेरे लिए भी अचीवमेंट रहता है। क्या पापा ने स्टेज परफॉर्मेस का कोई गुर दिया। अभिषेक बच्चन गुर बताते हैं, पापा यही कहते हैं कि गो एंड हैव फन एंड एंटरटेन ऑडियेंस जाओ, मजे करो और दर्शकों का मनोरंजन करो।
अभिषेक बच्चन अनफोरगेटेबल टूर के संदर्भ में बताते हैं कि हमलोगों ने टोरंटो, ट्रिनिडाड, लास एंजेलस, सैन फ्रांसिस्को, ह्यूस्टन, अटलांटिक सिटी, शिकागो, न्यूयॉर्क और लंदन में परफॉर्म किया। हमारे लिए यह बताना मुश्किल होगा कि किस शहर का शो सबसे अच्छा रहा। तीन-चार घंटों के लाइव परफार्मेस में पूरी मस्ती रहती थी। एक नशा तारी हो जाता था। पापा की एनर्जी हर शो में देखते ही बनती थी। मैं अपने सात-आठ गानों पर परफॉर्म करता था। ऐश्वर्या के साथ कजरारे और तेरे बिना को लोगों ने खूब सराहा और हां, मैंने पापा के सम्मान में सारा जमाना और परदेसिया पर भी नृत्य किए। पिता अमिताभ बच्चन के जन्मदिन पर उन्हें बधाई देते हुए अभिषेक बच्चन कहते हैं कि जब लोग मेरी तुलना पापा से करते हैं तो मुझे कोई तकलीफ नहीं होती है। यह बहुत स्वाभाविक है। जो लोग मेरी फिल्में लगातार देख रहे हैं, वे अब मानने लगे हैं कि मैं पापा से अलग होने या उनके जैसा होने की कोशिश नहीं करता। मेरी अपनी एक शैली है, धीरे-धीरे उसकी पहचान बन रही है। मुझे सरकार और सरकार राज में उनके साथ देखने के बाद इसे और स्पष्टता से लोगों ने समझा। पिता के साथ अपने संबंध के बारे में वे बताते हैं कि पापा मेरे सबसे अच्छे दोस्त, गाइड और आइडियल हैं। उन्होंने मुझे हमेशा प्यार, स्नेह और मार्गदर्शन दिया है। उनके साथ के कई अविस्मरणीय प्रसंग हैं। कई यादें हैं, जो प्रेरक हैं और ताकत देती हैं। काम के प्रति उनका लगाव तो सचमुच अनुकरणीय है। पापा हमेशा कहते हैं कि जिस प्रोफेशन में आए हो, वहां दर्शकों के प्रति तुम्हारी बड़ी जिम्मेदारी तो है ही एकजिम्मेदारी अपने प्रति भी है कि तुम्हारे आचरण से कोई आहत न हो।
-अजय ब्रह्मात्मज