विज्ञान की कल्पनाओं की एक परत और खोलते हुए यूनीवर्सिटी ऑफ एरीजोना के शोधकर्ताओं ने एक ऐसे रोबोट का निर्माण कर दिया है, जो मॉथ के दिमाग से उठने वाली तरंगों के आधार पर गति करता है।
यह रोबोट (मॉथ-बोट इसके लिए ज्यादा उपयुक्त शब्द होगा) इस यूनीवर्सिटी के इलेक्ट्रिकल एंड कंप्यूटर इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट के सहायक प्रोफेसर चार्ल्स एम. हिगिन्स के दिमाग की उपज है। 'दिमाग कैसे काम करता है?' गुत्थी सुलझाने की कोशिशों के तहत हिगिन्स ने इसे अपने विद्यार्थियों की टीम के साथ बनाया है।
''बायोलॉजिकल न्यूमरल सिस्टम्स की स्टडी, गणना के तरीकों के अनगिनत उदाहरणों को प्रदान करती है जो मानव निर्मित किसी भी तरीकों से कई गुना अधिक जटिल हैं। यह मानव द्वारा अर्जित अति आधुनिक प्राकृतिक ज्ञान को चुनौती है। बायोलॉजी की स्टडी से इंजीनियर्स काफी कुछ पा सकते हैं'', कहते है हिगिन्स। वे बताते हैं, ''पतंगे का दिमाग चावल के दाने से भी छोटा होता है। पतंगे का छोटा और कम जटिलता वाला दिमाग, शोध करने के लिए मुफीद था। रोबो-मॉथ के निर्माण से जुड़ी महत्वपूर्ण बात न्यूरोसाइंस की स्वीकार्यता को बढ़ाना है।''
इस क्रांतिकारी प्रयोग की प्रक्रिया कम रोमांचक नहीं थी। हिगिन्स बताते हैं, ''रोबोट की गति पतंगे के दिमाग में प्रत्यारोपित किए एक छोटे से इलेक्ट्रोड द्वारा निर्देशित की जाती है। यह इलेक्ट्रोड-उड़ते समय पतंगे की दृष्टि को एक समान बनाए रखने के लिए उत्तरदायी एकलौते न्यूट्रॉन से-विशेष रूप से जोड़ा गया है। यह न्यूट्रान इलेक्ट्रिक सिग्नल्स उत्सर्जित करता है, जिसे रोबोट के आधार पर एम्प्लीफाई कर दिया जाता है।''
पतंगे को रोबोट से जोड़ने के लिए, शोधार्थियों की टीम ने उसे 6 इंच ऊंचाई और पहियों वाले रोबोट के सिर पर लगे प्लास्टिक के टयूब में रखा। पतंगे को उड़ान भरने के लिए टीम ने उसे खड़ी रेखाओं की आकृति में पेंट की हुई 14 इंच ऊंची रिवाल्विंग दीवार वाले एक गोलाकार प्लेटफार्म में रखा। पतंगे के न्यूट्रान ने घूमती दीवार पर बनी खड़ी रेखाओं से रिएक्ट किया। और प्रोसेसिंग शुरू हो गयी।
हिगिन्स का जुड़ाव शोधकर्ताओं और वैज्ञानिकों के उस बैच से रहा है, जिसने मस्तिष्क की बनावट के अध्ययन के बाद अर्जित ज्ञान का इस्तेमाल नयी मशीन्स की डिजाइन बनाने में किया है। मशीन्स और मानव शरीर की कार्यप्रणाली के इस अध्ययन ने विकास की नयी दिशाएं खोली है। 'मैकेनिकल हार्ट इसका एक बेहतरीन उदाहरण है, '' हिगिन्स कहते है।
हिगिन्स के इस शोध को यूएस एयर फोर्स और यूएस नेशनल इंस्टीटयूट्स ऑफ हेल्थ द्वारा वित्तीय सहायता प्रदान की गयी है। इन दोनों संस्थाओं ने मानव दृष्टि के क्रिया-कलापों को समझने के लिए यह वित्तीय सहायता प्रदान की है। हिगिन्स के इस शोध से भविष्य में मस्तिष्क में होने वाली कई जटिल समस्याओं का निदान खोजने में मदद मिलेगी।
हिगिन्स कहते हैं, ''वैज्ञानिक काफी हद तक यह तो जानते है कि मानव मस्तिष्क कैसे काम करता है, लेकिन यह नहीं जानते कि ब्रेन को डैमेज होने से कैसे रोकें या फिर इसे किस प्रकार ठीक करे।'
..लेकिन शायद भविष्य में ऐसा भी संभव हो। हिगिन्स अभी तक अपने रोबो-मॉथ को बाएं और दाएं मोड़ पाने में सफल हुए है, लेकिन आगे और पीछे नहीं ले जा पाए है। रोबो-मॉथ की गति का सबसे लंबा समय 88 सेकेंड्स का रहा है!
आदर्श त्रिपाठी