मेरे दिल का टुकड़ा है केशव पंडित

वेदप्रकाश शर्मा की कलम से जन्में केशव पंडित की पापुलैरिटी 1980 के दशक में ऐसी छाई कि वह बन गया पाठकों का हीरो। केशव पंडित फिर लौट आया है छोटे पर्दे पर। केशव पंडित को लेकर वेद प्रकाश शर्मा से बातचीत-

[केशव पंडित ने इस सफर को कैसे तय किया?]

दरअसल, एकता कपूर को उनके डायलॉग राइटर ने मेरी पुस्तक केशव पंडित के विषय में बताया। एकता ने मुझे फोन किया और कहा कि क्या केशव पंडित के बारे में मैं मुंबई आकर उनसे डिस्कस कर सकता हूं? मैंने कहा,जरूर। एकता जी ने बड़े धैर्य से केशव पंडित के बारे में मुझसे सुना। लगभग छह घंटे तक वे सिर्फ केशव पंडित के विषय में मेरी बातें सुनती रहीं। उन्हें अच्छा लगा और उन्होंने केशव पंडित के राइट खरीद लिए।

[अब केशव पंडित की पहचान का दायरा और बढ़ेगा?]

बिल्कुल बढ़ेगा। अभी तक मैं हिंदी बेल्ट में पढ़ा जाता था। धारावाहिक के कारण अब विदेशों में भी मेरे उपन्यास केशव पंडित के प्रति लोगों की जिज्ञासा बढ़ेगी।

[क्या आपको लगता है कि सरवर आहूजा केशव पंडित के पात्र को निभाने में सक्षम हैं?]

मैंने जितने भी किरदार गढ़े हैं उनमें केशव पंडित मेरा सबसे प्रिय है। यह किरदार मेरे दिल को इतना छूता है कि लिखते-लिखते मेरी आंखों में आंसू आ जाते हैं। ऐसा नहीं है कि केशव पंडित मैं पॉपुलर होने के लिए लिखता हूं। रीडर्स की डिमांड पर ही मैंने अभी तक केशव पंडित के दस संस्करण लिखे हैं। जहां तक सरवर आहूजा की बात है तो केशव पंडित के रूप में उनको देखकर मुझे यही लगता है कि अगर केशव पंडित हकीकत में होता तो वह ऐसा ही होता।

[सौम्या अपराजिता]




लेख को दर्जा दें

दर्जा दें

0 out of 5 blips

(69) वोट का औसत

average:4.57971
Saving...
    शीर्षकों को अपने "मेरा याहू " पृष्ट पर शामिल करें
  • तस्वीर
  • ज़रा हटके
  • संपादकीय
  • दृष्टिकोण