
इस्लामाबाद। भारत भले ही मुंबई आतंकी हमले के कसूरवारों को जल्द से जल्द सजा दिलाना चाहता हो लेकिन पाकिस्तान में ऐसा होता नजर नहीं आ रहा। मुंबई हमले के सिलसिले में जिन सात संदिग्ध आतंकियों पर पाकिस्तान में मुकदमा चल रहा है, अब उनका फैसला लटक जाने के आसार पैदा हो गए हैं। मामले की सुनवाई कर रही आतंकवाद निरोधी अदालत के जज बकीर अली राणा ने कहा है कि अब वह इस मुकदमे की सुनवाई नहीं कर सकते। राणा ने हालांकि इसकी वजह नहीं बताई है।
इस मुकदमे की सुनवाई रावलपिंडी की अति सुरक्षित जेल में हो रही है। जज राणा ने मामले की सुनवाई से अलग होने के लिए मंगलवार को लाहौर हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखकर आग्रह किया। हालांकि इस पर मुख्य न्यायाधीश ने अभी कोई फैसला नहीं किया है।
सूत्रों का कहना है कि राणा ने यह कदम इसलिए उठाया क्योंकि सरकार व अन्य तबकों से उन पर दबाव डाला जा रहा था। इन आरोपियों में लश्कर-ए-तैयबा का आपरेशन कमांडर जकी उर रहमान लखवी और जरार शाह भी शामिल हैं। सूत्रों के अनुसार राणा पर इन संदिग्ध आतंकियों के वकीलों की ओर से भी दबाव डाला जा रहा था। ये वकील मुकदमे की सुनवाई की रिकार्डिग को लेकर नाराज हैं। ऐसी भी खबरें हैं कि राणा को लश्कर-ए-तैयबा की ओर से धमकी मिल रही हैं। गत 10 अक्टूबर को जब इन आरोपियों को दोषी ठहराया गया, अदालत के बाहर आत्मघाती हमला भी हुआ था।