
ढाका। मीडिया में आई एक खबर में कहा गया है कि वर्ष 2004 में प्रधानमंत्री शेख हसीना पर हुआ हमला उन्हें मारने की साजिश थी, जो बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी के कई नेताओं ने पार्टी प्रमुख खालिदा जिया के बेटे के कार्यालय में रची थी। साजिश में प्रतिबंधित संगठन हरकत उल जेहाद [हूजी] का इस्तेमाल किया गया था। डेली स्टार इंवेस्टिगेशन में दावा किया गया है कि हसीना को मारने की साजिश खालिदा जिया के बड़े बेटे तारिक रहमान के कार्यालय हवा भवन में रची गई थी। रिपोर्ट के अनुसार, 14 अगस्त, 2004 को नौ लोगों ने हवा भवन में बैठ कर वार्ता की, जिसमें पहले की कई बैठकों के परिणामों को शामिल किया गया। परिणामों में कहा गया था कि अवामी लीग को देश और इस्लाम के लिए सबसे बड़े खतरे के रूप में प्रचारित किया जाए। साथ ही उन्हें मारने की अनुशंसा की जाए। रिपोर्ट में कहा गया है, बैठक में तत्कालीन गृह कनिष्ठ मंत्री लित्फुजमान बाबर, उपमंत्री अब्दुस सलाम पिंटू, प्रधानमंत्री के राजनीतिक सचिव हैरिस चौधरी, शेख मुजीबुर रहमान के भगोड़े हत्यारे, जमात-ए-इस्लामी के एक उच्चस्तरीय नेता, हूजी के दो संस्थापक सदस्य और अल मरकाजुल इस्लामी का एक नेता शामिल हुआ, जिन्होंने इस फैसले पर सहमति जताई। रिपोर्ट के अनुसार, 15 अगस्त को यह सभी लोग इसी जगह पर एक बार फिर बैठे, ताकि अभियान को अंतिम रूप देने के लिए जगह निर्धारित की जा सके। भगोड़े हत्यारे ने सलाह दी कि हसीना पर उनके घर, रास्ते या किसी रैली में हमला किया जाना चाहिए।
रिपोर्ट में दावा किया गया है, उन्होंने छह दिन बाद होने वाली रैली के बारे में फैसला किया। अब हथियार चुनने की बारी थी, तब बाबर ने कहा 'ग्रेनेड ठीक' रहेंगे। ढाका में पार्टी की एक रैली में हुए इस हमले में हसीना बाल-बाल बच गई थीं, लेकिन इसमें 24 अन्य लोगों के मारे जाने के साथ 400 घायल हो गए थे। डेली स्टार में कहा गया है कि यह रिपोर्ट उसके द्वारा हासिल 'उच्चस्तरीय विशेषाधिकार दस्तावेज' के आधार पर आई है और अखबार के एक पत्रकार ने यह जानकारी मामले की पिछले पांच सालों से जांच में जुटे जांचकर्ताओं और खुफिया अधिकारियों से हासिल की है। एक अदालत ने तीन दिन पूर्व इस मामले की ताजा जांच के आदेश दिए थे, जिसके बाद यह रिपोर्ट आई है। हमले के बाद बाबर ने घोषणा की थी कि हमले के जिम्मेदार लोगों और समूहों के नाम सामने लाने वाले को एक करोड़ टका ईनाम दिया जाएगा। उन्होंने कहा था, सरकार ने ईनाम घोषित करने का फैसला किया है क्योंकि वह मामले को सर्वोच्च प्राथमिकता पर रखना चाहती है। इसके पहले बाबर की देखरेख में इस मामले की एक जांच हुई थी, जिसके बाद तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया था, लेकिन बाद की जांच में तीनों ही निर्दोष पाए गए थे। सीआईडी अधीक्षक अब्दुल कन्हार अकंद ने कल पत्रकारों से कहा, हमें कई संदिग्धों के इकबालिया बयानों के बाद बाबर के 21 अगस्त, 2004 के ग्रेनेड हमले में शामिल होने के बारे में अहम जानकारी और सबूत मिले थे।