
वाशिंगटन। जासूसी के आरोप में गिरफ्तार अमेरिकी वैज्ञानिक स्टीवर्ट डी. नोजेट इजरायल को गोपनीय और संवेदनशील जानकारिया देने के लिए बीस लाख डालर [करीब साढ़े नौ करोड़ रुपये] मांग रहा था। अमेरिकी संघीय जांच एजेंसी एफबीआई ने उस पर तय किए गए आरोपों में यह बात कही है।
अदालत में नोजेट पर तय किए गए आरोपों के मुताबिक वह डुले अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से इस साल 6 जनवरी को किसी देश की यात्रा पर गया था। तब उसके पास दो कंप्यूटर डिस्क थे, लेकिन 28 जनवरी को वापसी के वक्त डिस्क नहीं थे। 19 अक्टूबर को जब उसे वाशिंगटन के एक होटल से गिरफ्तार किया गया तो नोजेट ने इजरायली खुफिया सेवा के अधिकारी से कहा कि जिस गोपनीय जानकारी के बदले वह 20 लाख डालर या 9.5 करोड़ रुपये मांग रहा है, उसके लिए अमेरिका ने एक अरब डालर यानी करीब 47 अरब रुपये खर्च किए हैं।
एफबीआई के वकीलों ने अदालत से उसे रिहा नहीं करने का आग्रह किया है क्योंकि रिहाई से वह दूसरे देश भाग सकता है या कहीं राजनीतिक शरण ले सकता है।
नोजेट ने चंद्रमा पर पानी की खोज से जुड़े नासा के अभियान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। चंद्रयान अभियान के सिलसिले में वह दो बार भारत भी आ चुका है। उसे पिछले हफ्ते अमेरिकी संघीय एजेंसी एफबीआई के अधिकारियों ने गिरफ्तार किया था। वह इन अधिकारियों को इजरायली एजेंट समझ कर गोपनीय जानकारियों का सौदा कर रहा था।
नोजेट जालसाजी के एक मामले में पहले भी दोषी करार दिया जा चुका है। अखबार वाशिंगटन पोस्ट के मुताबिक तब उसने धमकी दी थी कि यदि अधिकारी उसे जेल भेजने की कोशिश करेंगे तो वह गोपनीय जानकारियां इजरायल या भारत को बेच देगा। वैसे, यह बात किसी दस्तावेज से सामने नहीं आई है।