
काठमांडू। नेपाल से जाली नोटों की बड़े पैमाने पर तस्करी पर भारत की चिंता के बाद दोनों देश सीमा पर चौकसी बढ़ाने पर सहमत हो गए है और इससे आतंकी गतिविधियां तथा मानव तस्करी रोकने में भी मदद मिलेगी।
दोनों देशों के बीच शनिवार को गृह सचिव स्तर की बातचीत में नेपाल और भारत प्रत्यर्पण संधि पर समझौते के करीब आ गए हैं।
एक बयान के मुताबिक भारत के गृह सचिव जी के पिल्लै और उनके नेपाली समकक्ष गोविंद कुसुम के नेतृत्व में दोनों देशों के शिष्टमंडलों की दो दिवसीय बैठक में दुहराया गया कि वे अपनी धरती का उपयोग आतंकवादी गतिविधियों के लिए नहीं होने देंगे।
कुसुम ने संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि दोनों पक्षों ने दक्षिण एशिया में सुरक्षा हालात और सीमा पार से आपराधिक गतिविधियों को रोकने पर सहमति जताई।
दोनों पक्ष अगले वर्ष की पहली तिमाही में सीमा प्रबंधन पर संयुक्त कार्यबल की संयुक्त बैठक करने पर सहमत हो गए। इसके अलावा वे जाली नोटों की तस्करी, मानव तस्करी और आतंकवादी गतिविधियां रोकने के लिए समन्वय स्थापित करने पर भी उन्होंने जोर दिया।
पिल्लै ने कहा कि बातचीत बहुत सफल रही और दोनों पक्ष सुरक्षा मसलों, सीमा प्रबंधन तथा शांति सुरक्षा बरकरार रखने के लिए सहयोग जारी रखने पर सहमत दिखे।
प्रत्यर्पण संधि पर उन्होंने कहा कि इस संबंध में कई प्रक्रियाएं चल रही है और दोनों देशों के गृह मंत्रियों के बीच इस पर चर्चा शुरू होने से पहले उच्च स्तर पर राजनीतिक विचार विमर्श की जरूरत है। एक प्रश्न के जवाब में पिल्लै ने कहा, कि संधि के मसौदे को लेकर कोई मतभेद नहीं है।
जनवरी 2005 में गृह सचिव स्तर पर नेपाल तथा भारत ने प्रत्यर्पण की संधि के मसौदे पर हस्ताक्षर किए गए थे। एक प्रश्न के जवाब में पिल्लै ने कहा कि भारत में माओवादियों और उनके नेपाली संबंधों के बारे में बातचीत में कोई चर्चा नहीं हुई।
भारत और नेपाल के माओवादियों के बीच संपर्क की बात स्वीकार करते हुए उन्होंने कहा दोनों के विचारधाराओं समानताएं नहीं है। पिल्लै ने कहा कि नेपाल के माओवादियों ने संसदीय लोकतंात्रिक प्रक्रिया को अपना लिया है जबकि भारत में उन्होंने अबतक सशस्त्र गतिविधियां नहीं छोड़ी है।