
वियाना। अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी का 35 सदस्यीय बोर्ड कुछ ही सप्ताह के भीतर भारत के लिए परमाणु नियमों को मंजूरी दे सकता है। कूटनयिकों का कहना है कि भारत और अमेरिका के बीच परमाणु करार की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम है।
आईएईए के सुरक्षा मानकों के बिना भारत परमाणु प्रौद्योगिकी निर्यातक देशों के साथ व्यापार की आशा नहीं कर सकता। ये वे देश हैं जो परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह के सदस्य हैं। एक कूटनयिक का कहना है कि परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह के सदस्य देश भारत के असैनिक प्रतिष्ठानों के निरीक्षण संबंधी नियमों को बोर्ड की मंजूरी मिलने के बाद बहुत जल्द मुलाकात कर सकते हैं।
आईएईए से जुड़े तीन कूटनयिकों ने अपनी गोपनीयता बरकरार रखने की शर्त पर बताया कि बोर्ड की बैठक 28 जुलाई तक हो सकती है। उनमें से एक का कहना है कि बोर्ड की बैठक जल्द बुलाने में दिक्कत होगी, क्योंकि सामान्य तौर पर सुरक्षा मानकों पर समझौतों के लिए बोर्ड की बैठक के लिए सदस्य देशों को 45 दिन पहले सूचित किया जाता है।
एक कूटनयिक का कहना है कि भारत के मामले में इस नियम में छूट दी जा सकती है क्योंकि एजेंसी के प्रमुख मोहम्मद अलबरदेई करार के पक्ष में हैं। दूसरी ओर अमेरिका और भारत की ओर से दबाव भी है। उन्होंने कहा कि अगस्त के आरंभ में कोई फैसला होने की संभावना है। क्या कोई तिथि निर्धारित की गई है, इस सवाल के जवाब में आईएईए की प्रवक्ता मेलिस्सा फ्लेमिंग ने कहा कि इस बारे में कुछ कहना जल्दबाजी होगी।
इस करार के हो जाने के बाद भारत परमाणु इंधन और असैन्य इस्तेमाल के लिए परमाणु प्रौद्योगिकी का आयात करने में सक्षम हो जाएगा। सामान्य तौर पर यह अधिकार उन देशों के पास सुरक्षित है जिन्होंने परमाणु अप्रसार संधि पर दस्तखत किए हैं। भारत ने इस संधि पर हस्ताक्षर करने से हमेशा इनकार किया है।