
इस्लमाबाद। कहा जाता है दुश्मन का दुश्मन दोस्त होता है। पाकिस्तान के अशांत कबाइली इलाके वजीरिस्तान में भी कुछ ऐसा ही हो रहा है। तालिबान कमांडर बैतुल्ला महसूद से टक्कर लेने के लिए यहां कई कबाइली नेताओं ने सरकार समर्थित लड़ाकू समूहों से हाथ मिला लिए हैं।
सोमवार को दक्षिण वजीरिस्तान की राजधानी वाना में हुए इस समझौते से सरकार समर्थित आतंकियों और महसूद गुट के बीच संघर्ष की संभावना बढ़ गई है। इस बैठक में अहमदजाई वजीर कबीले के 500 नेता और उत्तारी वजीरिस्तान के तालिबान 'शूरा' के प्रतिनिधि शामिल हुए। समझौते में मसूद प्रभावित इलाकों में लोगों, सरकारी उपक्रमों और मौलवी नजीर के समर्थकों की सुरक्षा की बात कही गई है। मौलवी नजीर सरकार समर्थित एक लड़ाकू दल के कमांडर हैं, जिनका संबंध वजीर कबीले से है। मौलवी नजीर दल के एक वरिष्ठ कमांडर ने इस बारे में कहा, 'अहमदजाई वजीर कबीले के चार हजार हथियारबंद दस्ते किसी भी समय हमारी मदद को तैयार हैं। इस नई गठबंधन सेना के प्रमुख सरकार समर्थक कमांडर हाफिज गुल बहादुर और मौलवी नजीर उप प्रमुख होंगे।'
बैतुल्ला समर्थक तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान का कहना है कि इस नए गठबंधन का मकसद महसूद और उसके साथियों को परेशान करना है। महसूद के एक नजदीकी सहायक के मुताबिक मौलवी नजीर लंबे समय से महसूद पर उजबेक आतंकियों को शरण देने व अपने समर्थकों पर हमले का आरोप लगा रहा है।
इस बीच, खबर है कि अफगान तालिबान द्वारा बैतुल्ला महसूद और मौलवी नजीर में समझौता कराने की कोशिशें नाकामयाब रहीं। मध्यस्थ की भूमिका निभाने वाले अफगान तालिबान के एक कमांडर के मुताबिक नजीर ने अपने इलाके से उजबेक आतंकियों को हटाने की बात कही, जो किसी भी हालत में संभव नहीं है।