
सापोरो [जापान]। आठ धनी देशों के संगठन जी-8 ने ग्रीनहाउस गैसों के वैश्विक उत्सर्जन को 2050 तक कम करने पर मंगलवार को सहमति जताई। भारत सहित पांच विकासशील देशों ने समूह से जलवायु परिवर्तन की दिशा में अधिक कुछ करने की अपील की थी।
इन देशों ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर भी चिंता जताई है। इसके अलावा जिंबाब्वे पर संयुक्त राष्ट्र की ओर से प्रतिबंध लगाए जाने पर सहमति हो गई है।
जी-8 के देशों ने चीन एवं भारत सहित सभी प्रमुख देशों से विश्व तापमान में संभावित खतरनाक बढ़ोतरी पर नियंत्रण के लिए कदम उठाने का आह्वान किया है। इस समूह में अमेरिका, जापान, रूस, जर्मनी, फ्रांस, ब्रिटेन, कनाडा तथा इटली शामिल हैं। जी-8 की ओर से जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त रूप से जारी वक्तव्य में कहा गया है कि इस चुनौती से वैश्विक प्रत्युत्तर के जरिये ही निपटा जा सकता है।
इन देशों ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर भी चिंता जताई है। शिखर सम्मेलन के दूसरे दिन ईरान से अपील की गई कि वह अपना परमाणु कार्यक्रम स्थगित कर दे और अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी के साथ सहयोग करे। जी-8 देशों के नेताओं के बीच जिंबाब्वे पर संयुक्त राष्ट्र की ओर से प्रतिबंध लगाए जाने पर सहमति हो गई है। जिंबाब्वे में हाल में संपन्न राष्ट्रपति चुनाव में बडे़ पैमान पर हिंसा और धांधली के मद्देनजर जी-8 देश यहां प्रतिबंध लगाए जाने के हक में हैं।
भारत ने अमीर देशों पर निशाना साधा
भारत समेत पांच उभरती अर्थव्यवस्थाओं ने अमीर देशों पर व्यापार को असंतुलित करने वाली सब्सिडी के जरिए विकासशील देशों के खाद्य उत्पादन को नुकसान पहुंचाने के लिए निशाना साधा।
जी-8 सम्मेलन के मौके पर स्वीकृत एक राजनीतिक घोषणापत्र में भारत, चीन, ब्राजील, दक्षिण अफ्रीका और मेक्सिको ने विकसित देशों से कहा कि वे क्योटो प्रोटोकाल की प्रतिबद्धताओं को पूरा करें। इन देशों ने 2020 तक ग्रीनहाउस गैस के उत्सर्जन में 25 से 40 फीसदी की कमी लाने को भी कहा। घोषणापत्र में कहा गया है कि वित्तीय अनिश्चितता और वैश्विक आर्थिक मंदी का अंतर्सबंध, बढ़ती खाद्य एवं तेल की कीमतें और जलवायु परिवर्तन के खतरे मिलकर मौजूदा परिदृश्य को और जटिल बना रहे हैं।