
वाशिंगटन। अमेरिका के नए खुफिया अनुमान में सामने आ रही बहुध्रुवीय दुनिया में भारत और चीन की पहचान प्रमुख उभरती शक्तियों के तौर पर की गई है और अंतरराष्ट्रीय जगत में यह खेल के नए अंशधारक और नियम सामने ला सकता है।
अमेरिकी राष्ट्रीय खुफिया निदेशालय की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि हम मानते हैं कि इस बात की अच्छी संभावना है कि भारत और चीन उभरना जारी रखेंगे। हालांकि उनके उभार की गारंटी नहीं है, साथ ही दोनों को उच्च आर्थिक और सामाजिक बाधाओं से पार पाना होगा।
ग्लोबल ट्रेंड्स-2025 ए वर्ल्ड ट्रांसफार्म्ड शीर्षक वाली रिपोर्ट उस समय सामने आई है जब बराक ओबामा का नया प्रशासन सत्ता संभालने जा रहा है और इसमें स्पष्ट तौर पर संकेत दिया गया है कि मौजूदा प्रवृत्तियदि 2025 तक जारी रहती है तो चीन के पास दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था होगी और वह अग्रणी सैनिक शक्ति होगा।
मौजूदा महाशक्ति अमेरिका हालांकि 2025 तक विश्व मंच पर सबसे महत्वपूर्ण बना रहेगा लेकिन नई वैश्विक बहुध्रुवीय व्यवस्था में यह कम प्रभावशाली होगा क्योंकि कई नए खिलाड़ी मैदान में होंगे।
रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत त्वरित आर्थिक विकास के मार्ग पर बना रहेगा लेकिन चेतावनी दी है कि आजादी के बाद से सिर उठा रहे क्षेत्रीय और जातीय विद्रोहों के बने रहने की संभावना है। इसमें कहा गया, लेकिन वे भारत की एकता को खतरा पैदा नहीं करेंगे। हमारा आकलन है कि नई दिल्ली को विश्वास बना रहेगा कि वह कश्मीरी अलगाववादी आंदोलन की रोकथाम कर सकता है। हालांकि माओवादी नक्सली आंदोलन के बढ़ते प्रभाव की वजह से देश के विभिन्न हिस्सों में हिंसा और अस्थिरता में बढ़ोत्तारी का भारत अनुभव करता रहेगा।
रिपोर्ट में जहां चीन को उभरती सैनिक शक्ति बताया गया है वहीं भारत के भावी सैनिक ताकत होने के बारे में यह खामोश है। भारत और अमेरिका के बीच विशेष तौर पर उच्च प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और इन संबंधों के एक तरह से गठबंधन ढांचे में तब्दील होने के आसार के साथ रिपोर्ट में दोनों देशों के रिश्तों में गहनता आने की बात कही गई है।
रिपोर्ट में कहा गया कि भारतीय नेता वाशिंगटन को सैनिक या आर्थिक संरक्षक के तौर पर नहीं देखते और अब मानते हैं कि अंतरराष्ट्रीय स्थिति ने ऐसे तत्व को अनावश्यक पैदा किए हैं।
इसमें हालांकि कहा गया कि नई दिल्ली अमेरिका के साथ मौजूदा समय में बढ़ रहे निकट संबंधों के रास्ते पर चलती रहेगी। रिपोर्ट में कहा गया कि भारतीय नेता अपने देश को उभरते चीन और अमेरिका के बीच राजनीतिक और सांस्कृतिक पुल के तौर पर पेश कर सकते हैं। रिपोर्ट में कहा गया कि बदलाव अर्थव्यवस्था के वैश्वीकरण से प्रेरित है।
भारत पर ध्यान केंद्रित करते हुए रिपोर्ट में कहा गया कि 1.5 अरब और लोगों के साथ अभूतपूर्व आर्थिक विकास विशेष तौर पर ऊर्जा, खाद्यान्न और जल जैसे संसाधनों पर दबाव बढ़ाएगा जिसकी कमी हो रही है क्योंकि मांग आपूर्ति से ज्यादा है।
रिपोर्ट के अनुसार अंतरराष्ट्रीय भूमिका में इंडोनेशिया, तुर्की और ईरान के साथ भारत, चीन तथा रूस का दखल बढ़ेगा। जनसंख्या के बारे में रिपोर्ट में कहा गया है कि हाल के अनुमानों के मुताबिक 2009 से 2025 के बीच विश्व की आबादी में 1.2 अरब का इजाफा होगा और यह मौजूदा 6.8 अरब से बढ़कर आठ अरब हो जाएगी। भारत आबादी के मामले में चीन से आगे निकल जाएगा।
रिपोर्ट में कहा गया है कि नई अंतरराष्ट्रीय प्रणाली के लिए अगले 20 साल का समय संक्रमण काल है। इस बीच पश्चिम एशिया में परमाणु हथियारों की होड़ और संसाधनों को लेकर संभावित हितों का टकराव जैसी समस्याएं देखने को मिल सकती हैं। रिपोर्ट के अनुसार 2025 तक आतंकवाद के समाप्त होने की संभावना कम ही है।