
पेरिस। किवदंती बन चुके महान वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टीन को पदार्थ और ऊर्जा के बीच संबंध को परिभाषित करने में महज कुछ साल लगे थे। लेकिन उस समीकरण की सत्यता को परखने में दुनिया के सबसे बेहतरीन वैज्ञानिकों और सुपर कंप्यूटरों को 103 साल लग गए।
फ्रांस के 'सेंटर फार थियोरेटिकल फिजिक्स' के लारेंट लेलाश के नेतृत्व में फ्रांसीसी, जर्मन और हंगेरियाई भौतिकशास्त्रियों ने मिलकर इस फार्मूले को सही प्रमाणित किया। प्रोटान और न्यूट्रान के द्रव्यमान के आकलन के लिए उन्हें सुपर कंप्यूटरों की मदद भी लेनी पड़ी। 'पार्टीकल फिजिक्स' के परंपरागत सिद्धांत के अनुसार परमाणु के केंद्रक में पाए जाने वाले प्रोटान और न्यूट्रान को क्वार्क्स कहा जाता है। ये कण आपस में 'ग्लूआन' से बंधे होते हैं। परमाणु में ग्लूआन का द्रव्यमान शून्य और क्वार्क्स का द्रव्यमान सिर्फ पांच फीसदी होता है। प्रश्न उठता है कि बाकी का 95 फीसदी द्रव्यमान कहां से आता है? शोध के मुताबिक यह द्रव्यमान क्वार्क्स व ग्लूआन की गति और उनकी आपसी टकराहट से पैदा होने वाली ऊर्जा से आता है। आइंस्टीन द्वारा 1905 में दिए 'सापेक्षता के सिद्धांत' के मुताबिक ऊर्जा और द्रव्यमान समतुल्य हैं। थ्योरी के मुताबिक ऊर्जा को पैदा नहीं किया जा सकता। सिर्फ उसका रूप परिवर्तित किया जा सकता है। आगे चलकर इसी फार्मूले पर परमाणु बम का निर्माण हुआ।