काहिरा। भूमध्यसागर के नीचे बिछे तीन अहम समुद्री केबल कट जाने से यूरोप और मिडिल ईस्ट सहित दक्षिण एशिया में टेलीफोन और इंटरनेट सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हुई हैं। इस वजह से भारत की इंटरनेट रफ्तार में 82 फीसदी और मिस्र की इंटरनेट रफ्तार में 80 फीसदी कमी आई है। इस मामले में मालदीव सबसे ज्यादा प्रभावित है, जहां सेवाएं सौ फीसदी बाधित हो गई हैं। ताइवान, सिंगापुर, मलेशिया, सऊदी अरब और पाकिस्तान में भी इंटरनेट सुविधा बाधित हुई हैं।
शनिवार को फ्रांसीसी टेलीकाम के एक अधिकारी ने यह जानकारी दी। टेलीकाम ने अपने बयान में कहा है कि सिसली और ट्यूनीशिया के बीच भूमध्यसागर में बिछे केबल तारों के कटने का कारण अभी स्पष्ट नहीं हुआ है। हो सकता है किसी जहाज के लंगर डालने की वजह से भी तार कट गए हों। फ्रांसीसी कंपनी ने कहा कि उनके तकनीकी जानकार गड़बड़ी ठीक करने के लिए रवाना हो चुके हैं। भूमध्यसागर में तैनात कंपनी की केबल मरम्मत करने वाली जहाज रेमंड क्रोज के आकलन के अनुसार मौजूदा समस्या से करीब 14 देश प्रभावित हुए हैं। कंपनी का कहना है कि सब कुछ ठीक होने में 31 दिसंबर तक का समय लग जाएगा।
विशेषज्ञों के अनुसार संचार सेवा बाधित होने का असर संबंधित क्षेत्रों की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है। विशेषज्ञ इटली के संचार ट्रेफिक को रेड सी की तरफ मोड़कर सेवाओं को ठीक करने का कोशिश में लगे हैं। अमेरिकी विशेषज्ञ स्टीफन ने कहा कि अगर टूटी हुई केबल को काट कर अलग कर दिया जाए तो समस्या सुलझ सकती है।
केबल कटने से दुनिया से कटे कई देश
तकनीकी रूप से इतना विकास करने के बावजूद आज भी दुनिया का ज्यादातर संचार सेटेलाइट से न होकर समुद्र में बिछी केबलों जैसी पुरानी तकनीकी के माध्यम से होता है। माना जा रहा है कि मिस्र और इटली के बीच अलेक्जेंड्रिया केबल स्टेशन के पास फ्लैग एफईए, एसएमडब्ल्यू4 और एसएमडब्ल्यू3 नामक तीन केबल लाइनें क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं। इसके अलावा सिसिली से 130 किमी की दूरी पर जीओ केबल के कटने की बात भी कही जा रही है। समुद्र के अगाध वक्षस्थलों पर तैरते इन तारों के संजाल ने ही पूरी दुनिया को एक कमरे में कैद करने का करिश्मा किया है।
दुनिया की सबसे बड़ी समुद्री केबल लाइनें
लाइनें लंबाई
सी मी वी-3 39000
सदर्न क्रास 30500
चीन-अमेरिका 30476
फ्लैग यूरोप एशिया 28000
साउथ अमेरिका-1 25000
एशिया में इंटरनेट उपभोक्ता
विश्व में इंटरनेट का उपयोग करने वाले कुल 1.3 अरब लोगों में से 50.10 करोड़ लोग केवल एशिया महाद्वीप से हैं। इसके साथ ही महाद्वीप में इनकी संख्या 882 फीसदी की सालाना दर से बढ़ रही है।
कौन कितना प्रभावित
देश प्रभावित (फीसदी)
भारत 82
सउदी अरब 55
जीबूती 71
मिस्र 52
सं रा अमीरात 68
लेबनान 16
मलेशिया 42
मालदीव 100
पाकिस्तान 51
कतर 73
सीरिया 36
ताइवान 39
यमन 38
जांबिया 62
पहले हुई घटनाएं
28 दिसंबर 2006-ताईवान के तटीय इलाके में जबरदस्त भूकंप के भूस्खलन के चलते ताईवान और फिलीपींस के बीच की नौ लाइनें कटीं। करीब एक सप्ताह तक कई एशियाई देश प्रभावित रहे
30 जनवरी 2008-भूमध्यसागर क्षेत्र में अलेक्जेंड्रिया के पास सीमीवी 4 और फ्लैग यूरोप एशिया केबलों के कटने से पूरे एशिया में इंटरनेट क्षमता तीन चौथाई कम हो गई थी।