
लंदन। यूरोपीय आयोग ने दुनिया भर के कारोबारियों को चेतावनी दी है कि समय रहते नई प्रणाली नहीं अपनाई गई तो अगले साल से इंटरनेट पर वेब एड्रेसों [वेब पतों] का टोटा पड़ सकता है।
आयोग के अनुसार इंटरनेट का कारोबार करने वाले वाणिज्यिक संस्थानों को तत्काल इंटरनेट प्रोटोकाल वर्जन 6 [आईपीवी 6] प्रणाली को अपना लेना चाहिए। यह नई प्रणाली 340 खरब से ज्यादा नए वेब पते उपलब्ध कराएगी। करीब एक दशक से तैयार आईपीवी 6 प्रणाली को कंपनियां अपनाने के लिए फिलहाल तैयार नहीं हैं।
ब्रिटिश अखबार 'द डेली टेलीग्राफ' की रिपोर्ट के मुताबिक यूरोपीय आयोग के एक सर्वेक्षण से पता चला है कि कुछ ही कंपनियां पुरानी प्रणाली आईपीवी 4 को छोड़कर नई प्रणाली आईपीवी 6 को अपनाने की तैयारी में हैं। ऐसे में वेब पतों का टोटा पड़ जाएगा। आईपीवी 4 और आईपीवी 6 तकनीक में वेब पते बनाए जाते हैं। इसके लिए हर वेब साइट का अपना आईपी एड्रेस होता है, जो उपयोगकर्ता को आवंटित किया जाता है। इससे उन्हें वेब एड्रेस याद रखने में आसानी होती है।
वर्तमान में कार्यरत आईपीवी 4 तकनीक में 32 बिट के एड्रेस का उपयोग किया जाता है, जो करीब 4.3 अरब नए पतों को चलाता है। वहीं आईपीवी 6 से 128 बिट के वेब एड्रेस का प्रयोग होगा, जिससे खरबों नए वेब एड्रेस बनाए जा सकेंगे। यूरोपीय आयोग के सूचना महानिदेशक डेटलेफ एकर्ट ने कहा,'पिछले दस सालों में इंटरनेट आर्थिक कारणों के चलते पूरी दुनिया में खासा महत्वपूर्ण हो गया है। इंटरनेट के विकास के लिए इसे आईपीवी 6 से जोड़ना बहुत जरूरी है। ताकि हम पूरी दुनिया से जुड़े रह सकें।'