
बीजिंग। दलाईलामा की प्रस्तावित अरुणाचल यात्रा से खफा चीन ने तिब्बती धर्मगुरू पर ताजा हमला बोला है। दलाईलामा की अरुणाचल यात्रा को चीन विरोधी कदम बताते हुए उसने तिब्बती धर्मगुरू को अलगाववादी करार दिया है। यही नहीं, उसने आरोप लगाया है कि दलाईलामा भारत और चीन के बीच तनाव पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं।
74 वर्षीय दलाईलामा इस समय जापान में हैं। उन्हें आठ नवंबर को अरुणाचल प्रदेश के तवांग मठ की यात्रा पर जाना है। वह पहले ही साफ कर चुके हैं कि उनकी यह यात्रा राजनीतिक नहीं है लेकिन, दलाईलामा के इस कार्यक्रम पर चीन के विदेश मंत्रालय ने मंगलवार को फिर नाराजगी जताई। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता मा झाओक्सू ने यहां कहा कि सीमावर्ती इलाके की दलाईलामा की यात्रा का हम पुरजोर विरोध करते हैं, यह अलगाववादी कदम है। हमारा मानना है कि इससे एक बार फिर दलाईलामा का चीन विरोधी रवैया उजागर हो गया है। उल्लेखनीय है कि चीन अरुणाचल प्रदेश के करीब 90 हजार वर्ग किमी इलाके पर अपना हक जताता रहा है।
चीन के प्रवक्ता ने दलाईलामा पर आरोप लगाया कि वह इस यात्रा के जरिए दोनों देशों के संबंधों में तनाव पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं। प्रवक्ता ने कहा, 'दलाईलामा अक्सर झूठ बोलते हैं और अन्य देशों के साथ चीन के संबंध बिगाड़ने वाली गतिविधियों में लिप्त रहते हैं। मुझे पूरा भरोसा है कि उनकी इस यात्रा का मकसद भी दोनों देशों के बीच तनाव पैदा करना है लेकिन वह इसमें कामयाब नहीं होंगे।'
लेकिन, चीन ने पिछली बार की तरह इस दफा दलाईलामा की यात्रा को मंजूरी देने के लिए भारत सरकार पर प्रत्यक्ष रूप से निशाना नहीं साधा है। वैसे इससे पहले भारत ने चीन से स्पष्ट शब्दों में कह दिया था कि दलाईलामा भारत में कहीं भी जाने के लिए स्वतंत्र हैं। हाल ही में थाइलैंड में आसियान सम्मेलन के दौरान भारतीय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और चीन में उनके समकक्ष वेन जियाबाओ के बीच मुलाकात हुई थी। मनमोहन ने कहा था कि दलाईलामा भारत के सम्मानित अतिथि हैं। इसके साथ ही उन्होंने कहा था कि तिब्बती शरणार्थियों को भारत में राजनीतिक गतिविधियों की इजाजत नहीं दी जाएगी।