
वाशिंगटन। अमेरिकी खुफिया रणनीतिकारों का कहना है कि पाकिस्तान सेना के जनरल राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी का तख्तापलट करने की साजिश रच रहे हैं। सैन्य जनरलों को यह डर सता रहा है कि ओबामा प्रशासन के दबाव में पाकिस्तान की सरकार फौज पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित कर सकती है। लेकिन, फौजी निजाम इस बार लोकतांत्रिक और राजनीतिक प्रक्रिया के जरिए ही पाकिस्तान की सत्ता पर हावी होना चाहता है।
उल्लेखनीय है कि पाकिस्तान की आजादी के बाद से मुल्क पर अधिकांश समय सैन्य जनरलों ने ही राज किया है। गैर सरकारी अमेरिकी संगठन 'स्ट्रैटफोर' के अनुसार सैन्य जनरलों को खौफ है कि अगले साल अक्टूबर में जब सेना का मौजूदा नेतृत्व सेवानिवृत्त होगा तो बढ़े अधिकारों के साथ जरदारी अपनी पसंद के जनरल नियुक्त कर सकते हैं।
स्ट्रैटफोर का मानना है कि पाकिस्तान की सेना जरदारी के साथ ओबामा प्रशासन के रिश्तों को जनरलों का दबदबा कम करने के रूप में देखता है। देश में तालिबान आतंकियों के बढ़ते प्रभाव के बीच पाकिस्तान की सेना पहले ही दबाव में है। स्ट्रैटफोर का कहना है कि घरेलू हालात और अमेरिकी दबाव के कारण लोकतांत्रिक तरीके से निर्वाचित सरकार को बर्खास्त करने की सेना की क्षमता सीमित हो गई है। सेना अब जरदारी को राजनीतिक तरीके से पद से हटाने की जुगत लड़ा रही है। स्ट्रैटफोर का कहना है, 'लक्ष्य मौजूदा सरकार को हटाने का नहीं बल्कि जरदारी से छुटकारा पाने का है ताकि सब कुछ विद्रोह के बजाय सांविधानिक प्रक्रिया के तहत होता दिखे।'
स्ट्रैटफोर के अनुसार विवादास्पद नेशनल रीकंसीलिएशन आर्डिनेंस [एनआरओ] का बढ़ता विरोध जरदारी को पद से हटने के लिए बाध्य कर सकता है। स्ट्रैटफोर ने कहा है कि पाक राष्ट्रपति की शक्तियां बढ़ाने वाला एक अधिकार, सेना में आला अधिकारियों की नियुक्ति करने की उसकी क्षमता है। अक्टूबर 2010 में इसकी अहम भूमिका होगी। तब मौजूदा सेना प्रमुख जनरल अशफाक परवेज कियानी समेत पाकिस्तानी फौज के कई आला अधिकारी सेवानिवृत्त होंगे।