
संयुक्त राष्ट्र। भारत ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में गोल्डस्टोन रिपोर्ट के परिणामों और इसकी अनुशंसाओं को बिना शर्त समर्थन देने पर आपत्ति जताई है। रिपोर्ट में हमास व इस्राइली सुरक्षा बलों को गाजा पट्टी में युद्ध अपराधों का दोषी ठहराया गया है।
भारतीय दल की ओर से वक्तव्य देते हुए सांसद बीके हरिप्रसाद ने कहा कि हमें गोल्डस्टोन रिपोर्ट की कुछ अनुशंसाओं और इसकी कुछ प्रक्रियाओं को बिना शर्त समर्थन देने पर आपत्ति है। हमारी आपत्ति इसमें अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायालय की भागीदारी को लेकर भी है।
हरिप्रसाद ने भारत द्वारा पूर्व में उठाई आपत्तियों को एक बार फिर दोहराया। भारत ने रिपोर्ट की कई खामियों पर चिंता जताई थी। ऐसी ही एक कमी के बारे में कहा गया था कि रिपोर्ट में यह स्वीकार किया गया है कि इसके परिणाम आपराधिक मुकदमों में पेश किए जाने वाले सबूतों के मानकों पर सही साबित हों, यह जरूरी नहीं है।
यूएन फैक्ट फाइडिंग मिशन द्वारा दक्षिण अफ्रीका के जज रिचर्ड गोल्डस्टोन के नेतृत्व में तैयार की गई इस रिपोर्ट में हमास और इस्राइली सुरक्षा बलों को दिसंबर 2008 से जनवरी 2009 के बीच गाजा पट्टी में युद्ध अपराधों का दोषी ठहराया गया है।
भारत ने जोर दिया कि रिपोर्ट की अनुशंसाओं पर जिनेवा स्थित ह्यूमन राइट्स काउंसिल में बात होनी चाहिए, न कि सुरक्षा परिषद समेत संयुक्त राष्ट्र के किसी अन्य संस्थान में। हालांकि भारत ने रिपोर्ट की जवाबदेही संबंधी अनुशंसा का समर्थन किया है।
हरिप्रसाद ने कहा, गाजा संघर्ष में शामिल सभी पक्षों को आत्मविश्लेषण की जरूरत है। अंतरराष्ट्रीय मानवता संबंधी नियमों और मानवाधिकारों का उल्लंघन करने वाले लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए सभी पक्षों को विश्वसनीय और द्रुत गति से काम करने की जरूरत है।
उन्होंने कहा, हमारा मानना है कि फिलस्तीन मुद्दे का समाधान संयुक्त राष्ट्र के प्रस्तावों और अरब शांति योजना के अनुरूप हो।
फिलस्तीन के संघर्ष के प्रति अपनी सतत प्रतिबद्धता जाहिर करते हुए भारत ने कहा कि देश ने फिलस्तीन में मानवीय सहायता के लिए संयुक्त राष्ट्र राहत एवं कार्य एजेंसी को 10 लाख डॉलर की सहायता उपलब्ध कराई है।
इसी बीच गुट निरपेक्ष देशों ने गोल्डस्टोन रिपोर्ट का समर्थन करते हुए सदस्य देशों से प्रासंगिक प्रस्ताव के पक्ष में मत देने का आग्रह किया है।