
वाशिंगटन। अमेरिका के टेक्सास स्थित सबसे बड़े सैन्य ठिकाने फोर्ट हुड में मुस्लिम अधिकारी निदाल मलिक हसन द्वारा गोलीबारी की घटना के बाद सेना में मुसलमानों की भर्ती, सुरक्षा और उनकी भूमिका को लेकर सवाल उठने शुरू हो गए हैं।
हसन बतौर मेजर मनोचिकित्सक के पद पर तैनात था। उसने गुरुवार को अंधाधुंध गोलियां बरसा कर गोलीबारी में 12 सैनिकों समेत 13 लोगों को मार दिया था और 38 को जख्मी कर दिया था। इससे पहले उसने लोगों को कुरान की प्रतियां भी बांटी थीं।
10.4 लाख सैनिकों की क्षमता वाली अमेरिकी सेना में मुसलमानों की संख्या लगभग 3500 है। हसन ने जो किया, वह क्यों किया इस बारे में तो अभी कुछ पता नहीं चला है। पर अधिकारियों का कहना है कि अभी तक मिले सबूतों के मुताबिक हसन ने इस्लाम में गहरी आस्था और संवेदनशीलता की वजह से इस घटना को अंजाम दिया।
हसन की एक रिश्तेदार ने बताया, 'मुसलमान होने की वजह से उसे प्रताड़ना का सामना करना पड़ता था और वह नौकरी छोड़ना चाहता था।' हसन के एक सहयोगी की मानें तो उसने इराक और अफगानिस्तान में अमेरिकी हस्तक्षेप को लेकर नाराजगी जाहिर की थी। उसने कहा था कि मुसलमानों को आक्रमणकारियों के खिलाफ खड़े होने की जरूरत है।
इस बीच कुछ दक्षिणपंथी लोगों ने सेना में मुसलमानों की उपस्थिति को खतरा बताया है। अमेरिकी सेना का कहना है कि इस घटना के बाद सैन्य बलों में कार्यरत मुसलमानों के खिलाफ किसी प्रतिक्रिया के संकेत नहीं हैं। हालांकि अमेरिकी सेना के चीफ आफ स्टाफ जनरल जार्ज केसी ने कहा, 'मुझे घटना की प्रतिक्रिया होने की आशंका है। मेरी नेताओं और लोगों से अपील है कि जांच पूरी होने किसी तरह के कयास न लगाएं।'
शीर्ष अमेरिकी सैन्य अधिकारी एडमिरल माइक मुलेन के प्रवक्ता कैप्टन जान किरबी ने बताया कि भर्ती संबंधी नीतियों में बदलाव के बारे में सोचना अभी जल्दबाजी होगी। सेना इस समय भर्ती की प्रक्रिया में बदलाव के लिए कोई कदम नहीं उठा रही है।