लंदन। चार्ल्स डारविन ने कहा था कि जीवन की शुरुआत समुद्र में नहीं बल्कि धरती पर एक गर्म छोटे तालाब में हुई थी। अब नए अध्ययन में दावा किया गया है कि महान प्रकृतिवादी का 140 साल से भी पहले का यह सिद्धांत वास्तव में सही हो सकता है।
जर्मनी स्थित ओस्नाब्रुक विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने पाया है कि शुरुआती कोशाणु भूमिगत गर्म जल के कारण छोटे तालाब में घनीभूत वाष्प या धरती की सतह के पास भाप के बुलबुलों की वजह से पैदा हुए होंगे। उनका यह निष्कर्ष 'प्रोसिडिंग्स ऑफ द नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज' जर्नल में प्रकाशित हुआ है। 'डेली मेल' की रिपोर्ट में कहा गया है कि यह निष्कर्ष बहुत सारे लोगों की इस अवधारणा को चुनौती है जो मानते हैं कि जीवन की शुरुआत समुद्र में हुई। अपने अध्ययन के लिए शोधकर्ताओं ने प्राचीन द्वीपों के चट्टानों में मिले रसायनों और समुद्री आवासों के रसायन का विश्लेषण किया। इसके बाद उनकी तुलना धरती पर मिले पहले कोशाणुओं के आनुवांशिक पुनर्निर्माण से किया। शोधकर्ताओं ने पाया कि समुद्र में जीवन को पोषण के लिए आवश्यक चीजों के संतुलन का अभाव है।
वैज्ञानिकों ने कहा कि वास्तव में जो प्रारंभिक कोशाणु द्वीपों की हैचरी में एकत्र हुए वैसा गर्म झरनों व ज्वालामुखी की सक्रियता से भूमंडल के अंदरूनी हिस्से से निकले वाष्प की वजह से हुआ। इन उत्सर्जनों की रासायनिक संरचना कोशिकाओं की अकार्बनिक गुण धर्म के बहुत करीब थीं। जीवन के विकास की यह भूमि गहरे समुद्र के बिल्कुल उलट है।
मोबाइल पर ताजा खबरें, फोटो, वीडियो व लाइव स्कोर देखने के लिए जाएं m.jagran.com पर