थिंपू (भूटान)[प्रशांत मिश्र]। एक ऐसे देश में जहां चारों ओर प्रकृति की अनुपम छटा बिखरी हो, वहां यह साल कई बदलाव ला रहा है। भूटान में राजशाही कालोकतंत्र में रूपांतरण हो रहा है और इसके साक्षी हो रहे हैं भारत के प्रधानमंत्री डा. मनमोहन सिंह। दो दिन की यात्रा पर यहां पहुंचे डा. सिंह ने शुक्रवार को भूटान के राजा जिग्मे सिग्मे वांगचुक से मुलाकात की। शनिवार को वह संसद को संबोधित करेंगे।
महज छह लाख की आबादी और करीब 38 हजार वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल के इस छोटे किंतु नैसर्गिक सौंदर्य के धनी देश में आप एक ही दिन में मौसम के सारे रंग देख सकते हैं। भूटान के लगभग सभी नेताओं और राज परिवार के सदस्यों की शिक्षा भारत के बड़े शहरों में हुई। वे अपने विशाल पड़ोसी की परंपराओं और संस्कृति से परिचित हैं। डा. सिंह ने इसीलिए यहां पहुंचते ही दोनों देशों के सदियों पुराने संबंधों को याद किया।
भूटान में इन दिनों बहुत कुछ घट रहा है। पहली बार यहां चुनाव हुए और निर्वाचित सरकार बनी। राजा जिग्मे सिग्मे के पुत्र और देश के नए राजा का राज्यारोहण भी इसी वर्ष होना है। यह शाही परिवार वांगचुक के सत्तारोहण का शताब्दी वर्ष है। ठीक आधी सदी पहले भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू भूटान की यात्रा पर आए थे। आधुनिक संदर्भ में दोनों देशों के बीच मधुर रिश्तों की बुनियाद उसी साल पड़ी थी। डा. मनमोहन सिंह की यह यात्रा इस मायने में भी अनूठी है क्योंकि भूटान की संसद को संबोधित करने वाले वह किसी भी देश के पहले प्रधानमंत्री होंगे।
भारत ने हमेशा भूटान का साथ दिया। इस देश की मौजूदा दसवीं पंचवर्षीय योजना में भारत ने चार हजार करोड़ रुपये की मदद दी है। दोनों देशों के परस्पर संबंधों की गर्माहट का असर प्रधानमंत्री के स्वागत में देखा जा सकता था। पारो के हवाईअड्डे से लेकर वहां से 60 किलोमीटर दूर राजधानी तक सड़क के दोनों ओर बच्चे भारत और भूटान के झंडे लेकर खड़े थे। स्कूलों में छुट्टियां कर दी गई थीं।
पद अलग, स्कार्फ अलग
भूटान में अगर आप किसी को केसरिया या नारंगी रंग का स्कार्फ पहने देखें तो समझ जाएं कि अमुक व्यक्ति सरकार में मंत्री है। स्कार्फ पहनना हरेक के लिए जरूरी है और सबके रंग अलग हैं। राजा या राजपरिवार का स्कार्फ पीला होगा जबकि नागरिक और धार्मिक पदों पर बैठे उच्चाधिकारियों को लाल रंग का स्कार्फ पहनना होता है। राज परिवार के सलाहकार या हाईकोर्ट में जन प्रतिनिधि नीले रंग का स्कार्फ पहनते हैं जबकि ग्राम प्रमुख और सहायक जिला प्रशासक सफेद और लाल स्कार्फ। सफेद स्कार्फ पर नीली धारियां हों तो समझ लें सामने वाला नेशनल असेंबली का सदस्य है। सरकारी दफ्तरों में आप सामान्य पोशाक पहन कर नहीं जा सकते। वहां जाना है तो महिलाओं को खास भूटानी पोशाक 'कीरा' और पुरुषों को 'घो' पहनना होगा।