काठमांडू। भारत के माओवादियों को हिंसा छोड़ने का सख्त संदेश देते हुए प्रचंड ने कहा है कि नेपाल के चुनावों में वामपंथी विद्रोहियों की जीत से उन्हें बंदूक और वोट के बीच का फर्क समझ जाना चाहिए।
माओवादी दल के प्रमुख पुष्प कमल दहल उर्फ प्रचंड ने कहा कि हमारा व्यवहार, हमारी नीति, हमारा तरीका अपने आप में भारत के माओवादियों के लिए सख्त संदेश है। हालांकि हम उनसे सीधे यह बात नहीं कह रहे हैं, लेकिन हमें जो फायदा हुआ है उससे बंदूक और मतपत्रों के बीच अंतर का संदेश जा चुका है। प्रचंड ने कहा कि भारत के माओवादियों के बीच गंभीर विचार-विमर्श होना चाहिए।
माओवादी नेता ने कहा है कि 1950 की भारत-नेपाल संधि की समीक्षा दोनों देशों के बीच के रिश्तों को नुकसान नहीं पहुंचाएगी। प्रचंड ने कहा कि वे भारत के साथ नई समझ पर आधारित नजदीकी व विशेष रिश्ते चाहते हैं। नेपाल के भावी प्रधानमंत्री माने जा रहे प्रचंड ने कहा कि हम बेहतर रिश्ते, बेहतर समझ और बेहतर सहयोग चाहते हैं। संधि के प्रत्येक प्रावधान की समीक्षा की जाएगी। हालांकि प्रचंड ने कहा कि राजनीतिक स्तर पर वे नई दिल्ली और बीजिंग के साथ समान दूरी बनाए रखेंगे। उन्होंने कहा कि हम एक देश के खिलाफ या दूसरे के पक्ष में नहीं खडे़ होंगे। पूर्व विद्रोही भारत और नेपाल के बीच खुली सीमा तथा भारतीय कामगारों के वहां काम करने की अनुमति का विरोध करते रहे हैं। नेपाल में हिंदी फिल्मों पर प्रतिबंध भी उनकी एक मांग है। प्रचंड के निशाने पर संधि के जो प्रावधान हैं, उनमें नेपाल द्वारा विदेश से हथियार खरीदने से पहले भारत से परामर्श करना प्रमुख है।
यह पूछे जाने पर कि क्या वे अमेरिका से माओवादियों को आतंकवाद संबंधी सूची से निकालने का आग्रह करने के लिए भारत को राजी करेंगे, प्रचंड ने कहा कि मैं उनसे आग्रह नहीं करूंगा लेकिन उनसे ऐसी अपेक्षा करता हूं।