बाउचर के मुशर्रफ प्रेम पर भड़के शरीफ

 
Jul 03, 04:41 pm

इस्लामाबाद। पाकिस्तानी राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ के भाग्य के फैसले को पाकिस्तान का अहम मुद्दा नहीं करार देने के एक शीर्ष अमेरिकी अधिकारी के कदम से नाराज पूर्व पाकिस्तानी प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने अमेरिका की तीखी आलोचना करते हुए बृहस्पतिवार को कहा कि उनके देश को मुशर्रफ से निबटने के सवाल पर किसी की सलाह की जरूरत नहीं है।

मुशर्रफ ने लाहौर से बृहस्पतिवार को इस्लामाबाद हवाई अड्डे पर पत्रकारों से बातचीत में कहा कि पाकिस्तान अपना फैसला खुद करेगा। एक असंवैधानिक राष्ट्रपति के साथ क्या किया जाना चाहिए यह पाकिस्तान का अपना मामला है। किसी विदेश सलाह की कोई जरूरत नहीं है।

उल्लेखनीय है कि अमेरिकी विदेश उपमंत्री रिचर्ड बाउचर ने बुधवार का कहा था कि पाकिस्तान को सुरक्षा उग्रवाद और खाद्यान्न की बढ़ती कीमतों तथा बिजली की किल्लत पर ध्यान देना चाहिए।

शरीफ ने पाकिस्तान के कबायली इलाके में चरमपंथियों के खिलाफ सुरक्षाबलों के सैन्य अभियान की आलोचना की। पीपीपी नीत सत्तारूढ़ गठबंधन के महत्वपूर्ण सहयोगी पीएमएल-एन के नेता ने कहा कि उत्तार पश्चिम सीमांत प्रांत की राजधानी पेशावर के निकट खैबर एजेंसी में सैन्य कार्रवाई की शुरुआत करने से पहले सरकार ने अपने सहयोगियों को विश्वास में नहीं लिया।

उल्लेखनीय है कि शनिवार को अ‌र्द्धसैनिक बलों ने खैबर एजेंसी में तीन चरमपंथी समूहों के खिलाफ अभियान की शुरुआत की। बाउचर ने कल इस अभियान का स्वागत किया था और कहा था कि आतंकियों ने लोगों को आतंकित कर रखा है और पेशावर के लिए भी खतरा हैं। बहरहाल, शरीफ ने कहा कि खैबर एजेंसी के इस कबायली इलाके में यह नए सैन्य गठबंधन की आपसी समझ के खिलाफ है। सत्तारूढ़ पीपीपी को अपने सहयोगियों से सलाह-मश्विरा किए बगैर महत्वपूर्ण फैसले नहीं करना चाहिए।

पूर्व प्रधानमंत्री ने कहा कि पाक में आज वहीं हालात फिर हैं जो आम चुनाव से पहले थे। हम उन्हीं हालात में हैं जिनमें हम 18 फरवरी से पहले थे। शरीफ मांग कर रहे हैं कि मुशर्रफ के खिलाफ महाभियोग चलाया जाए और उनके खिलाफ देशद्रोह का मामला चलाया जाए। पीएमएल-एन पिछले साल आपातकाल के दौरान मुशर्रफ के हाथों अपदस्थ जजों की बहाली की अपनी मांग पर पिछले मंत्रिमंडल से हट चुकी है। शरीफ ने इसपर मायूसी जताई कि सरकार जनादेश का सम्मान नहीं कर रही है। उन्होंने रेखांकित किया कि सुरक्षा समस्याओं के हल के लिए पहले यह फैसला किया गया था कि उत्तर पश्चिम सीमांत प्रांत और फाटा इलाकों में संवाद को मौका दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि पीएमएल-एन को इसकी कोई जानकारी नहीं है कि बाद में यह नीति कैसे बदल दी गई। सुरक्षा बलों की ओर से अभियान चलाने जैसे बड़े फैसले किसी एक पार्टी की ओर से नहीं लिए जाने चाहिए।




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