करार के प्रति भारत का संकल्प सराहनीय

 
Jul 24, 10:56 am

सिंगापुर। अमेरिका ने भारत-अमेरिका ऐतिहासिक परमाणु करार के लिए अपना अस्तित्व दांव पर लगाकर लोकसभा में विश्वास का मत जीतने वाली संप्रग सरकार की मजबूत संकल्पशक्ति की सराहना की है।

अमेरिकी विदेश मंत्री कोंडोलीजा राइस आसियान देशों के मंत्रियों की बैठक के सिलसिले में यहां आई हैं। इसी दौरान बुधवार रात उन्होंने विदेश राज्य मंत्री आनंद शर्मा से मुलाकात की। उच्च पदस्थ सूत्रों ने बताया कि नेताओं के बीच बातचीत बहुत अच्छी रही जिसमें राइस ने ऐतिहासिक परमाणु समझौते पर आगे बढ़ने के भारत के संकल्प की सराहना की।

सूत्रों ने बताया कि दोनों नेताओं ने समझौते से जुड़े तमाम पहलुओं पर विचार किया। दोनों नेता बृहस्पतिवार को फिर बातचीत करेंगे। शर्मा दस सदस्यीय एसोसिएशन आफ साउथ ईस्ट एशियन नेशंस [आसियान] में भारतीय दल का नेतृत्व कर रहे हैं।

आसियान के मंत्रियों की बैठक में इस क्षेत्रीय संगठन के सदस्यों ने भारत-अमेरिका परमाणु करार का स्वागत करते हुए कहा कि इससे भारत को ऊर्जा सुरक्षा मिलेगी और उम्मीद जताई कि दोनों देश जल्द इस समझौते पर हस्ताक्षर करेंगे।

मंगलवार को संप्रग सरकार के विश्वास मत हासिल करने के बाद अमेरिका ने कहा था कि वह समझौते से पूर्व आईएईए और 45 देशों के परमाणु आपूर्तिकर्ता देशों में संपन्न होने वाली औपचारिकताओं को जल्द पूरा करवाने में मदद करेगा। परमाणु समझौते पर समर्थन जुटाने के लिए भारत का एक प्रतिनिधिमंडल इसी सप्ताह एनएसजी के सदस्य देशों की यात्रा पर निकलेगा। इस दौरान खास तौर से उन देशों का रुख किया जाएगा, जिन्हें भारत को असैनिक परमाणु कारोबार की छूट देने में एतराज रहा है। सरकार को उम्मीद है कि आईएईए का संचालक मंडल भारत के सुरक्षा मानक समझौते को मंजूरी दे देगा।

सूत्रों ने बताया कि आईएईए देशों के सदस्यों का समर्थन जुटाने के इस अभियान पर भारत से कपिल सिब्बल, पृथ्वी राज चव्हाण और आनंद शर्मा को विभिन्न देशों में भेजा जाएगा और वह उन्हें भारत की स्थिति की जानकारी देने के साथ ही उसे यह छूट दिए जाने के कारणों का खुलासा करेंगे।

मंत्रियों के अलावा राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार एम. के. नारायणन, विदेश सचिव शिवशंकर मेनन और विदेश मंत्रालय के अन्य अधिकारी भी समर्थन जुटाने के इस अभियान के तहत एनएसजी देशों की यात्रा करेंगे। सुरक्षा मानक समझौते को मंजूरी और एनएसजी से मिलने वाली रियायत भारत-अमेरिका परमाणु करार के कार्यान्वयन के प्रमुख पड़ाव हैं। इन पड़ावों से गुजरने के बाद समझौते पर अमेरिकी कांग्रेस की मंजूरी लेनी होगी। अमेरिकी कांग्रेस की बैठक होने में अब कम ही समय बचा है। ऐसे में अमेरिका को परमाणु आपूर्तिकर्ता देशों की बैठक जल्द बुलाने की पहल करनी होगी, ताकि भारत को अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर असैन्य परमाणु कारोबार की इजाजत मिल सके। अमेरिकी कांग्रेस की बैठक सितंबर से पहले ही होनी है। इसके बाद उसकी बैठक अगले वर्ष जनवरी में राष्ट्रपति पद का चुनाव संपन्न होने के बाद ही होगी।




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