पेरिस। फ्रांस के राष्ट्रीय दिवस [बेस्टाइल डे] के मौके पर मंगलवार को यहां होने वाले समारोह में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह बतौर मुख्य अतिथि भाग लेंगे। साथ ही भारतीय सैनिक फ्रांस के अपने समकक्षों के साथ परेड में भी शामिल होंगे।
भारत के सैनिकों का इस परेड में भाग लेना देश के प्रति फ्रांस की ओर से दिए जाने वाले विशेष सम्मान का प्रतीक होगा। सिंह फ्रांस के इस समारोह में बतौर मुख्य अतिथि भाग लेने वाले पहले भारतीय नेता होंगे। फ्रांस में राष्ट्रीय दिवस के मौके पर विभिन्न देशों के राष्ट्राध्यक्षों या सरकार प्रमुखों को आमंत्रित किया जाता है।
फ्रांस के राष्ट्रपति निकोलस सरकोजी के न्योते पर पेरिस में होने वाले समारोह में भाग लेने के लिए रवाना होने के मौके पर सिंह ने कहा कि यह भारत की जनता के लिए सम्मान की बात है। उन्होंने रवानगी के मौके पर अपने एक वक्तव्य में कहा कि भारत और फ्रांस के बीच करीबी तथा व्यापक सामरिक भागीदारी है। हमारे फ्रांस के साथ संबंध कई क्षेत्रों में हैं और इन्होंने हमारे राष्ट्रीय हितों के लिए काम भी किया है।
सरकोजी को गत वर्ष गणतंत्र दिवस के मौके पर मुख्य अतिथि के तौर पर आमंत्रित किया गया था और उन्होंने समान तरह की प्रतिक्रिया वाला रूख दर्शाते हुए सिंह को भी अपने देश आने का न्योता दिया।
भारतीय सेना के तीनों अंगों से 400 सैनिकों की एक टुकड़ी फ्रांस के सैनिकों के साथ डेढ़ किलोमीटर लंबे [चैम्प्स इलिसीज] पर परेड में भाग लेगी। इस मौके पर सेना का 90 सदस्यीय बैंड भारतीय मार्शल संगीत की धुन बजाएगा। सरकोजी के कार्यालय की ओर से कहा गया कि फ्रांस के समारोह में भाग लेने के लिए भारतीय सैनिकों को न्योता देना देश की इस मान्यता का प्रमाण है कि भारत की अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य में अहम भूमिका है और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की स्थाई सदस्यता के लिए भारत की दावेदारी का हम समर्थन करते हैं।
उधर, एएफपी की खबर के अनुसार फ्रांस के रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता लारेंट टीसीयरे ने कहा कि भारतीय सैनिकों को न्योता दिया जाना यह दर्शाता है कि उनका देश भारत के साथ करीबी संबंधों पर जोर देना चाहता है। दोनों देशों की सेना के बीच के रिश्ते भी पुराने हैं क्योंकि दोनों विश्व युद्धों के दौरान भारतीय सेना फ्रांस की सेना के साथ गठबंधन में लड़ी थी।
मार्च 1915 में ब्रिटेन की कमान के तहत भारतीय सैनिक अलाइड डिविजन के एक हिस्से के तौर पर फ्रांस के बलों के साथ जर्मनी की फौज से न्यूवे चैपले में लड़े थे। फ्रांस के राष्ट्रीय दिवस को [बेस्टाइल डे] कहा जाता है। यह बेस्टाइल बंदी गृह में जनता के 14 जुलाई 1789 को धावा बोल देने के दिन की वर्षगांठ के रूप में मनाया जाता है। जुलाई 1789 में इसी दिन से फ्रांस की क्रांति की शुरुआत हुई थी। बेस्टाइल बंदीगृह उस समय में 16वें लुई की निरंकुश सत्ता का प्रतीक था। बेस्टाइल पर कब्जा कर लोगों ने यह कड़ा संदेश दिया कि राजा की सत्ता अब निरंकुश नहीं है।
बहरहाल, जब बेस्टाइल पर कब्जा किया गया तब वहां महज सात बंदी ही मौजूद थे लेकिन यह घटना फ्रांस के सभी नागरिकों के लिए दमन के खिलाफ लड़ाई और आजादी प्रतीक के तौर पर देखी जाती है। इसी घटना के नतीजतन निरंकुश राजशाही खत्म हुई, फ्रांस एक संप्रभु राष्ट्र के तौर पर उभरा और 1792 में यह गणराज्य बन गया। का्रंतिकारी बेंजामिन रेस्पाइल की सिफारिश पर छह जुलाई 1880 को बेस्टाइल डे को फ्रांस का राष्ट्रीय दिवस घोषित किया गया था।